धरती की पुकार

जैव विविधता भूल तुम निकले हो आगे
तरक्की के लिए तबाह करे कई जंगल
कुछ वर्षों में तुम सांस भी न ले सकोगे
क्यों प्रकृति से कर रहे हो तुम अमंगल 
ये मावन नाश का है इकट्ठा होता काल
यह प्रकृति का विनाश नहीं है सुन लो
हे मनु मेरे संरक्षण को कदम उठाओ
या बेमौत मौत का रास्ता ही चुन लो
बड़े-बड़े कंक्रीट के महल बनाए तुमने
अंधधुंध कटान कर  पेड़ गिराए तुमने
दर्द मेरा ना जाना आजतक किसी ने
गुल में खिजां के फूल महकाए हैं तुमने
क्यों लुप्त हो रही है मेरी वो हरियाली
क्यों मेरे खून की नदियां हो रही काली
ये मनु बेटा सब तेरा ही किया धरा है
तूने पहले ही भविष्य की मौत बुला ली
मैं तो तेरा हर बोझ रोज सह रही हूं
सुधार जा, आपदा लाकर कह रही हूं
अब तो ये दर्द मुझसे भी न सहा जाता
देखना अपनों को ही कर तबाह रही हूं 
अभी भी वक्त है थोड़ा तो संभल जा
मेरी कही बातों पर थोड़ा अमल ला
बेटा, मैं तुझे संरक्षण दूंगी जिंदगी भर
मेरी रक्षा के लिए तू कुछ काम तो कर 

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