आतंक का कोई धर्म नहीं तो रमजान के महीने में दया की दृष्टी क्यों ?

जम्मू-कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने नौ मई को ऑल पार्टी मीटिंग के बाद केंद्र सरकार से रमजान के पाक महीने में आतंकियों के खिलाफ एकतरफा सीजफायर करने की अपील की है यानी आतंकी चाहे तो इस माह एकत्रित होकर भारत के खिलाफ को भी बड़ा षड्यंत्र रच लें, लेकिन भारत सरकार अथवा भारतीय सेना आतंकियों के खिलाफ कोई कार्रवाई न की जाए, ऐसा क्यों? यह सवाल मेरे मन को कचोट रहा है। एक ओर कहते हैं कि आतंकियों का कोई धर्म नहीं होता तो फिर आतंकियों के प्रति रमजान के महीने में हमदर्दी क्यों? क्यों आखिर राज्य सरकार इसको लेकर रेजूल्यूशन ला रही है कि इस माह कोई सीजफायर नहीं किया जाना चाहिए? आखिर अब तक दुनिया में जितने भी आतंकी हमले हुए हैं, उसमें एक धर्म विशेष के आतंकी ही क्यों शामिल रहते हैं। और इन आतंकियों के लिए रमजान के महीने का क्या महत्व।आतंकी तो आतंकी है और उसके खिलाफ कार्रवाई करने के लिए कोई भी वक्त तय करना उचित नहीं है कि आमुक वक्त के बाद ही आतंक के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। आतंकियों को तो जब भी देखा जाए, उस वक्त ही उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। अब सवाल यह है कि अगर आतंकियों के खिलाफ रमजान के माह में कोई कार्रवाई नहीं की जाती है और उनको एक माह के लिए बख्श दिया जाता है तो इसका मतबल है कि हम भारत के लिए कोई और बड़ा खतरा पैदा होने देंगे। ऐसा खतरा जो जम्मू-कश्मीर के हालात को और बिगाड़ सकता है क्योंकि कश्मीर के हालात पहले ही खराब हैं, ऐसे में अगर सीजफायर नहीं किया जाता है तो इसका कोई बड़ा खामियाजा भुगतने के लिए कश्मीर घाटी और देश को तैयार रहना होगा। अगर केंद्र और जम्मू कश्मीर की सरकारें चाहती हैं तो रमजान के माह में भी आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई जारी रखनी होगी।

एक नजर दुनिया भर के आठ बड़े हमलों पर नजर

अब तक दुनिया में आठ बड़े आतंकि हमले हुए हैं जिनमें 4000 से अधिक निर्दोष लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 15000 के करीब लोग घायल हुए हैं। चलिए एक नजर डालते हैं अब तक हुए बड़े आतंकी हमलों पर...

मुंबई में 26/11 हमला

26 नवम्बर 2008 को भारतीय इतिहास में एक काले दिन के रूप में याद किया जाता है। इस दिन मुंबई में एक साथ कई जगह आतंकवादी हमले हुए थे। भारतीय इतिहास में इस हमले को सबसे उग्र हमला माना जाता है। आतंकियों ने ताज होटल, ओबरॉय होटल, नरीमन हाऊस, कामा अस्पताल और सीएसटी समेत कई जगह एक साथ हमला किया था। आतंकियों और सुरक्षाबलों के बीच 60 घंटे से भी ज्यादा समय तक मुठभेड़ चलती रही। इसमें 160 से भी ज्यादा लोगों ने अपनी जान गंवाई।

अमेरिका में 9/11 हमला

9/11 हमला विश्व इतिहास का सबसे उग्र, बड़ा और भंयकर आतंकवादी हमला माना जाता है। इसमें लगभग 3000 लोग मारे गए और 8900 लोग घायल हो गए थे। 11 सितंबर 2001 को अमेरिका पर अलकायदा द्वारा आत्मघाती हमला किया गया। अलकायदा के आतंकवादियों ने चार यात्री जेट वायुयानों का अपहरण कर लिया। अपहरणकर्ताओं ने जानबूझकर उनमें से दो विमानों को वर्ल्ड ट्रेड सेंटर, न्यूयॉर्क शहर के ट्विन टावर्स के साथ टकरा दिया, जिससे विमानों पर सवार सभी लोग तथा भवनों के अंदर काम करने वाले अन्य अनेक लोग भी मारे गए। अपहरणकर्ताओं ने तीसरे विमान को वाशिंगटन डीसी के बाहर, आर्लिंगटन, वर्जीनिया में पेंटागन में टकरा दिया, अपहरणकर्ताओं द्वारा वाशिंगटन डीसी की ओर अपहरण किए गए चौथे विमान को कुछ यात्रियों एवं उड़ान चालक दल द्वारा विमान का नियंत्रण फिर से लेने के प्रयास के बाद विमान ग्रामीण पेंसिल्वेनिया में शैंक्सविले के पास एक खेत में जा टकराया, किसी भी उड़ान से कोई भी जीवित नहीं बचा।

पेशावर में स्कूल पर हमला

पाकिस्तान के पेशावर शहर में एक सैनिक स्कूल में तालिबान के हमले में 132 बच्चों समेत 140 से ज़्यादा लोग मारे गए थे। तालिबानी आतंकवादियों ने स्कूल की चारदीवारी से अंदर घुसकर ताबड़तोड़ गोलियां बरसाई थीं। अपनी जान बचाने में कामयाब छात्रों ने इस दर्दनाक हमले का मंजर बयां करते हुए कहा था कि आतंकवादी एक कक्षा से दूसरी कक्षा में जाकर बच्चों को गोलियां मारते रहे। बच्चों को निशाना बनाने की इस घटना की दुनियाभर में निंदा हुई थी।

पेरिस में सिलसिलेवार आतंकी हमले

फ्रांस की राजधानी पेरिस में 14 नवंबर 2015 को नेशनल स्टेडियम के बाहर एक रेस्टोरेंट और कॉन्सर्ट हॉल में हुई गोलीबारी और धमाकों में 120 से ज्यादा लोग मारे गए। हथियारों से लैस आतंकियों ने 100 से ज्यादा लोगों को मौत के घाट उतार दिया, जो बैटाक्लां म्यूजिक हॉल में रॉक कॉन्सर्ट देखने गए थे। यह धमाका उस वक्त हुआ जब फ्रांस और जर्मनी के बीच नेशनल स्टेडियम में फुटबॉल मैच चल रहा था। आतंकी एके-47 और कुछ बम के साथ पहुंचे थे। इस हमलें में फ्रांस के सुरक्षाबलों ने जवाबी कारवाई में 8 आतंकियों को मार गिराया था। आतंकी संगठन आईएस ने इस हमले की जिम्मेदारी ली थी।

11 जुलाई 2006 में मुंबई में ट्रेन बम ब्लास्ट

आतंकियों ने मांटुगा रोड, माहिम, बांद्रा, खोर रोड, जोगेश्वरी, बोरिवली समेत कई जगहों पर मुंबई की लोकल ट्रेनों में धमाके किए। बमों को प्रेशर कुकरों में रखा गया था। इन हमलों में 200 से ज्यादा लोग मारे गए थे और लगभग 700 घायल हुए थे।

मॉस्को के थिएटर में हमला

23 अक्टूबर 2002 को मॉस्को में डुबरोवका थियेटर में हथियार बंद आतंकवादियों ने करीब 850 लोगो को बंधक बना लिया था। इस आतंकी हमले में करीब 130 लोग मारे गए थे और 700 से ज्यादा लोग घायल हुए थे। हमले में 40 आतंकी भी ढेर हो गए थे।

सितंबर 2004 बेसलैन स्कूल हमला

रूस के बेसलैन स्कूल में हुए इस हमले को चेचेन आतंकियों ने अंजाम दिया था। इस हमले को आतंकियों द्वारा स्कूली बच्चों को निशाना बनाए जाने वाले हमलों में सबसे बड़े और क्रूर हमले के तौर पर जाना जाता है। उन्होंने 3 दिन तक स्कूल में बच्चों समेत 1100 बंधक बनाए रखा, अंत में स्कूल में मिलिट्री ऑपरेशन को अंजाम दिया गया, जिसमें आतंकियों समेत 385 लोगों की मौत हो गई और 783 लोग घायल हो गए थे।

अफगानिस्तान में आतंकी हमला

अफगानिस्तान में आतंकी हमला 23 नवंबर, 2014 को तालिबान के आत्मघाती हमलावर ने अफगानिस्तान में वॉलीबॉल मैच देख रहे 60 से अधिक लोगों को मार डाला था।

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