इश्क का तमाशा



बड़े दिन बीते हैं आपका नूरानी चेहरा देखे।
आते क्यों नहीं, हर बार क्यों भूल जाते हैं।।
आओ आज फिर इश्क का तमाशा बनाते हैं।
ढेरों कसमें खाते हैं व हंस के भूल जाते हैं।।
प्यार में लड़ाई झगड़े तो जायज हैं सनम।
खुद की कही यह बातें क्यों भूल जाते हैं।।
सदाबहार रखिए प्यार की मौसमी बरसात।
ऐसे न बनो, ज्यों रुत बदलते फूल जाते हैं।।

आओ अब थूक दो सिर का सारा ये गुस्सा।
कुछ तुम भूलो और कुछ हम भूल जाते हैं।।
उठाओ कसम न रूठेंगे कभी एक दूसरे से।
प्यार निभाने के लिए ऐसा उसूल बनाते हैं।।

महक जाएं हमारे बगल की यह फिजाएं।
चमन-ए-इश्क कोई ऐसा फूल खिलाते हैं।।
अब आगोश में लो हमजोली को रविन्द्र।
सारे जामाने की एक होकर भूल जाते हैं।।

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