हिमाचल प्रदेश में 9 नवम्बर को विधानसभा चुनावों की वोटिंग होगी। भाजपा और कांग्रेस में बगावत टिकटों के आवंटन से ही शुरू हो गई हैं। कांग्रेस में जहां बगावत के सुर दबे हुए हैं तो वहीं भाजपा की बगावत जग जाहिर हो गई है। भाजपा में बगावत करने वाले कोई और नहीं हैं बल्कि भाजपा के अपने दिग्गज नेता हैं। इनमें भाजपा के वर्तमान विधायकों से लेकर पूर्व के मंत्री व वरिष्ठ नेता तक शामिल हैं। कहीं भाजपा के अपनों की यह बगावत पार्टी के सत्ता हासिल करने के सपने को सिर्फ एक सपना ही न कर दे यानी सत्ता हासिल करने का सपना तो देखा पर पूरा नहीं हुआ और सत्ता हाथ से निकल गई। वैसे हिमाचल प्रदेश के नाम जब से भाजपा आई है तब किसी भी पार्टी की सरकार के रिपीट न होने का रिकार्ड है, लेकिन भाजपा के नेताओं की इस बार की बगावत इस रिकार्ड तो तोड़ सकती है यानी कांग्रेस पार्टी दोबारा सत्ता में आकर सरकार बना सकती है। इसमें सबसे अहम रोल अदा करने वाले और कोई नहीं बल्कि भाजपा के नेताओं का ही होगा।
भाजपा ने इस बार के विधानसभा चुनावों के लिए अपने उम्मीदवारों का पैनल उतारा है, उसमें सबसे ज्यादा उम्मीदवारों की प्राथमिकताओं, उसकी जनता में कितनी पैठ है और वह विपक्षी पार्टी के उम्मीदवार को पटकनी देने की कितनी हिम्मत रखता है, इन सब चीजों को ध्यान में रखा गया है। हिमाचल प्रदेश में चुनावों की घोषणा होने से पूर्व ही भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व विधानसभ अध्यक्ष तुलसी राम शर्मा ने भरमौर से जिया लाल कपूर को टिकट देने का विरोध दर्ज करवा दिया था। उन्होंने यहां तक कह दिया था कि पार्टी हाईकमान अगर भरमौर से जिया लाल कपूर को टिकट दिया तो वह आजाद उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ेंगे, लेकिन पार्टी हाईकमान ने उनकी इस चेतावनी को नजरअंदाज करके फिर भी जिया लाल को टिकट दे दिया। वहीं भरमौर से ही भाजपा के दो अन्य समर्थक और नेता डा. जनक राज पखरेटिया और ललित ठाकुर भी अब आजाद प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लडऩे का ऐलान कर दिया है। इससे पार्टी में और बगावत हो गई, जिसका सीधा-सीधा फायदा कांग्रेस पार्टी के नेता और वनमंत्री ठाकुर सिंह भरमौर को मिलेगा।
चम्बा से भाजपा ने कांग्रेस से पार्टी में शामिल हुए कांग्रेस नेता और पूर्व कांग्रेस प्रत्याशी पवन नैय्यर को टिकट दी है। पवन नैय्यर को भाजपा बी.के. चौहान 2 बार पटखनी दे चुके हैं, लेकिन इस बार भाजपा ने अपने प्रत्याशी को साइड करके कांग्रेस से भाजपा में शामिल हुए पवन नैय्यर को टिकट दे दिया है। जबकि बी.के. चौहान चाहते थे कि डा. डी.के. सोनी को चम्बा से भाजपा का प्रत्याशी बनाया जाए, लेकिन ऐसा नहीं हुआ तो बी.के. चौहान और डी.के. सोनी दोनों ने आजाद चुनाव लडऩे का ऐलान कर दिया है। इसका सीधा-सीधा फायदा फिर कांग्रेस के नीरज नैय्यर को मिलेगा। नीरज के समर्थन में वोट करने के लिए पूर्व कांग्रेस सरकार में मंत्री रहे हर्ष महाजन ने भी लोगों से आह्वान कर दिया है। हर्ष महाजन चम्बा की राजनीति में एक मात्र ऐसा चेहरा हैं, जिनका कहना भाजपा के दिग्गज नेता भी मानते हैं।
हिमाचल प्रदेश के विभिन्न जिलों में भी पार्टी द्वारा पुराने और वरिष्ठ नेताओं को छोड़कर नए नेताओं को टिकट देने पर विरोध के स्वर उठ गए हैं। पार्टी के नेता हाईकमान को जहां टिकट में परिवर्तन करने की मांग कर रहे हैं तो वहीं ऐसा नहीं करने की स्थिति में आजाद चुनाव लडऩे के साथ-साथ सीधे कांग्रेस उम्मीदवार का समर्थन करने की भी बात कर रहे हैं, जिससे प्रदेश में भाजपा की डगर और भी मुश्किल हो रही है।
सोलन में भाजपा की टिकट न मिलने से नाराज कुमारी शीला ने पार्टी के खिलाफ झंडा बुलंद कर लिया है। हाईकमान को ललकारते हुए कुमारी शीला ने यहां तक कह डाला की पार्टी किसी के बाप की नहीं है। भाजपा ने पुराने कार्यकत्र्ताओं की अनदेखी की है। उन्होंने कहा कि भाजपा में पांच अक्तूबर को कोई आता है और 15 तारीख को टिकट ले जाता हैए क्या भाजपा में एक भी पुराना चेहरा नहीं हैए जो टिकट के काबिल हो। भड़कते हुए कुमारी शीला ने कहा कि इसके बाद उनके समर्थक जो कहेंगे वह वही करेगी। अगर उन्होंने चुनाव लडऩे के लिए समर्थक कहते हैं तो वह आजाद प्रत्याशी के तौर पर मैदान में उतरेंगी।
कुल मिलाकर देखा जाए तो हिमाचल प्रदेश में सत्ता हासिल करने का सपना देख रही भाजपा की राह हर दिन मुश्किल हो रही है।
भाजपा ने इस बार के विधानसभा चुनावों के लिए अपने उम्मीदवारों का पैनल उतारा है, उसमें सबसे ज्यादा उम्मीदवारों की प्राथमिकताओं, उसकी जनता में कितनी पैठ है और वह विपक्षी पार्टी के उम्मीदवार को पटकनी देने की कितनी हिम्मत रखता है, इन सब चीजों को ध्यान में रखा गया है। हिमाचल प्रदेश में चुनावों की घोषणा होने से पूर्व ही भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व विधानसभ अध्यक्ष तुलसी राम शर्मा ने भरमौर से जिया लाल कपूर को टिकट देने का विरोध दर्ज करवा दिया था। उन्होंने यहां तक कह दिया था कि पार्टी हाईकमान अगर भरमौर से जिया लाल कपूर को टिकट दिया तो वह आजाद उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ेंगे, लेकिन पार्टी हाईकमान ने उनकी इस चेतावनी को नजरअंदाज करके फिर भी जिया लाल को टिकट दे दिया। वहीं भरमौर से ही भाजपा के दो अन्य समर्थक और नेता डा. जनक राज पखरेटिया और ललित ठाकुर भी अब आजाद प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लडऩे का ऐलान कर दिया है। इससे पार्टी में और बगावत हो गई, जिसका सीधा-सीधा फायदा कांग्रेस पार्टी के नेता और वनमंत्री ठाकुर सिंह भरमौर को मिलेगा।
चम्बा से भाजपा ने कांग्रेस से पार्टी में शामिल हुए कांग्रेस नेता और पूर्व कांग्रेस प्रत्याशी पवन नैय्यर को टिकट दी है। पवन नैय्यर को भाजपा बी.के. चौहान 2 बार पटखनी दे चुके हैं, लेकिन इस बार भाजपा ने अपने प्रत्याशी को साइड करके कांग्रेस से भाजपा में शामिल हुए पवन नैय्यर को टिकट दे दिया है। जबकि बी.के. चौहान चाहते थे कि डा. डी.के. सोनी को चम्बा से भाजपा का प्रत्याशी बनाया जाए, लेकिन ऐसा नहीं हुआ तो बी.के. चौहान और डी.के. सोनी दोनों ने आजाद चुनाव लडऩे का ऐलान कर दिया है। इसका सीधा-सीधा फायदा फिर कांग्रेस के नीरज नैय्यर को मिलेगा। नीरज के समर्थन में वोट करने के लिए पूर्व कांग्रेस सरकार में मंत्री रहे हर्ष महाजन ने भी लोगों से आह्वान कर दिया है। हर्ष महाजन चम्बा की राजनीति में एक मात्र ऐसा चेहरा हैं, जिनका कहना भाजपा के दिग्गज नेता भी मानते हैं।
हिमाचल प्रदेश के विभिन्न जिलों में भी पार्टी द्वारा पुराने और वरिष्ठ नेताओं को छोड़कर नए नेताओं को टिकट देने पर विरोध के स्वर उठ गए हैं। पार्टी के नेता हाईकमान को जहां टिकट में परिवर्तन करने की मांग कर रहे हैं तो वहीं ऐसा नहीं करने की स्थिति में आजाद चुनाव लडऩे के साथ-साथ सीधे कांग्रेस उम्मीदवार का समर्थन करने की भी बात कर रहे हैं, जिससे प्रदेश में भाजपा की डगर और भी मुश्किल हो रही है।
सोलन में भाजपा की टिकट न मिलने से नाराज कुमारी शीला ने पार्टी के खिलाफ झंडा बुलंद कर लिया है। हाईकमान को ललकारते हुए कुमारी शीला ने यहां तक कह डाला की पार्टी किसी के बाप की नहीं है। भाजपा ने पुराने कार्यकत्र्ताओं की अनदेखी की है। उन्होंने कहा कि भाजपा में पांच अक्तूबर को कोई आता है और 15 तारीख को टिकट ले जाता हैए क्या भाजपा में एक भी पुराना चेहरा नहीं हैए जो टिकट के काबिल हो। भड़कते हुए कुमारी शीला ने कहा कि इसके बाद उनके समर्थक जो कहेंगे वह वही करेगी। अगर उन्होंने चुनाव लडऩे के लिए समर्थक कहते हैं तो वह आजाद प्रत्याशी के तौर पर मैदान में उतरेंगी।
कुल मिलाकर देखा जाए तो हिमाचल प्रदेश में सत्ता हासिल करने का सपना देख रही भाजपा की राह हर दिन मुश्किल हो रही है।

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