पर मोदी का सपना पूरा होना चाहिए

आज अपने सपनों की छोड़ दूसरों के सपनों का भारत बनाने की होड़ मची हुई है। यार कभी यह भी बोलो कि हमारे यह सपने हैं और हम अपने सपनों का भारत इस तरह का देखना चाहते हैं। इस मुद्दे पर अपने कोई भी व्यक्ति विचार नहीं रखता है। यह बड़ी विडम्बना है भारतीय समाज में कह दे या फिर भारतीय लोगों की मानसिकता, इनको भेड चाल में चलाना बड़ा अच्छा लगता है। दूसरों के पीछे चलने के बेहतर है कि अपना खुद का रास्ता चुनों और जीवन को उसी रास्ते पर आगे लेकर जाओ। परंतु भारतीय लोगों से यह सब उम्मीदें करना बेकार की बातें हैं।
भारतीय को तो सिर्फ और सिर्फ चाटुकारिता करनी अच्छी लगती है। चाहे गुलामी के समय में कई भारतीयों ने अंग्रेजों की चाटुकारिता और आजादी के बाद अब पहले कांग्रेस के चंद नेताओं की फिर भाजपा आई तो इनके नेताओं की। आखिर लोग की सोच है कहां? क्यों नहीं लोग अपनी सोच को लेकर आगे बढ़ते हैं। हर बात के लिए किसी व्यक्ति विषष की चाटुकारिता या यूं कह दें कि पीछे पड़ने में भारतीय लोग बड़े माहिर हैं। भारतीय लोगों में अपने दम पर यानी अकेले कुछ कर गुजरने की हिम्मत ही नहीं है। कोई काम करवाना हो तो पहले नेताओं को बताओ कि हम यह काम कर रहे है फलां-फलां विभाग से संबंधित है अगर आप वहां कह दें तो काम जल्द हो जाएगा। आखिर कब तक ऐसा भी चलता रहेगा।

अब भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ही ले लो। उन्होंने अपने मन की बात कार्यक्रम शुरू कर दिया। अरे सर आप अपने मन की बात तो कर रहे हैं लेकिन 125 करोड भारतीयों के मन क्या-क्या कहते हैं इसके बारे में भी सोचों। कभी उनके मन की बात भी सुनों। पर ऐसा कहां है। ऐसा होता ही नहीं है। आजादी के 7 दशक गुजर गए हैं लेकिन कभी यह मौका नहीं आएगा होगा कि लोगों के मन की बात भी सुनी गई हो। अगर सुनी गई हो तो उसके मन की पूरी भी हुई है या नहीं? इसी तरह से उन्होंने एक और कार्यक्रम भारत के विकास को लेकर शुरू कर दिया मेरे सपनों का भारत। अब भाजपा पार्टी के कार्यकर्त्ता किसी भी कार्य को पूरा करने के लिए बस यही कह रहे है कि मोदी के सपनों का भारत बनाने के लिए हमें अमुक अमुक प्रदेश में कमल खिलाना है। यार कमल खिलाओ आप अच्छी बात है, लेकिन कभी आम लोगों के सपनों की ओर भी ध्यान दो कि आखिर वह चाहते क्या हैं। शायद ही इस ओर किसी का ध्यान जाता हो। लेकिन सबसे बड़ी बात यह है अगर किसी भी देश को विकसित करना चाहते हैं तो इसके लिए आम लोगों का विकास होना या यूं कहें कि उनको मूलभूत सुविधाएं देना जरूरी हैं। अगर यह मूलभूत सुविधांए सभी को मिल जाती हैं तो मोदी क्या पूरे 125 करोड भारतीय लोगों के सपनों का भारत बन जाएगा।

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