आजादी के आज 7 दशक बीत गए हैं। केंद्र में कई सरकारें आई और चली गईं। कुछ विकास कार्य हुए तो कुछ विनाश कार्य। अब आप बोलोगे कि विकास कार्य तो हुए पर यह नए कार्य यानी विनाश कार्य क्या हैं। तो इनकी वही लंबी सूची है, जिसको एक चैप्टर में संजोना काफी मुश्किल है। विनाश कार्यों से मेरा मतलब है कि सरकार चाहती तो विकास थी, परंतु कुछ लोगों ने मिलकर अपना विकास तो कर लिया पर जनता की भलाई का विनाश कर दिया। जनता की समस्याओं पर किसी का ध्यान नहीं गया। अबलता आज भी ऐसा लगता है कि हम अभी अभी आजाद हुए हैं और बहुत से विकास कार्य करने हैं। आखिर ऐसा क्यों? 7 दशकों तक जो सरकारें आई उन्होंनेे क्या किया? अब किया तो उन्होंने भी बहुत कुछ पर उस दौर में मीडिया में इतनी प्रतियोगिता नहीं थी या यूं कह भी दें तो कोई अतिशियोक्ति नहीं होगी कि उस समय मीडिया न के बराबर भी। लोगों तक सरकार का संदेश पहुंचने में महीनों लग जाते थे और अधिकतर लोगों को पता भी नहीं चलता था कि सरकार क्या कर रही है या लोगों के लिए कौन-कौन से योजनाएं बना रही है।
उस समय लोगों में कुछ चुनिंदा को योजनाओं की जानकारी रही और उन्होंने उनका काफी फायदा भी उठाया, लेकिन अधिकांश लोगों को योजनाओं के बारे में कोई जानकारी नहीं थी और उनको किसी प्रकार का लाभ नहीं मिला। इसका परिणाम यह हुआ कि जिनको योजना का पता चलता गया वह फायदा लेकर समृद्ध सम्पन्न हो गए, परंतु योजनाओं की जानकारी के अभाव में एक तबका पूरी तरह से वंचित रहा और आर्थिक तौर पर पिछड़ गए। इन सबका कारण एक ही था कि उस समय में योजनाओं के प्रचार-प्रसार के लिए कोई उचित साधन नहीं थे। इंटरनेट नहीं था, लोग शिक्षित नहीं थे, टी.वी. और अन्य जनसंचार के माध्यम नहीं थे, ऐसे में लोगों को किसी प्रकार की जानकारी समय पर नहीं मिल पाती थी।
पिछले अढाई दशक में जनसंचार के माध्यमों में जो क्रांति आई है और शिक्षा का स्तर ऊंचा हुआ उससे लगभग सभी लोगों को अपडेट कर दिया है। आज सोशल मीडिया, न्यूज पोर्टल, न्यूज चैनल, बैव पत्रिकाएं, सांय कालीन समाचार पत्र, दैनिक अखबार, टी.वी. व रेडियो इतने सारे माध्यम आज हमारे सामने हैं, जिससे हम किसी घटना के घटित होने के कुछ दिन देर में उसके बारे में जान लेते हैं, अधिकतर न्यूज पोर्टल, न्यूज चैनल, बैव पत्रिकाएं, सांय कालीन समाचार पत्र, दैनिक अखबार, टी.वी. व रेडियो सोशल मीडिया के साथ जुड़े हुए हैं। जैसे ही इनमें कोई खबर अपडेट हुई सोशल मीडिया पर वायरल हो जाती है और अधिक-से-अधिक लोगों को एक साथ अपडेट कर देती है।
अब जरा मैं आपको बताता हूं कि हम लोग आज किसी भी मुद्दे या समस्या का हल अभी चाहते हैं। अरे जितनी जल्द आज हम समस्या का हल चाहते हैं उतनी जल्दी तो आजादी भी नहीं मिली थी। आजादी पाने के लिए भी लगभग 100 साल तक संघर्ष करना पड़ा था। खैर में आपको बीते हुए दिन में नहीं ले जाना चाहा हूँ, लेकिन जिस तरह से हम सरकार से उपेक्षाकृत हैं क्या किसी कार्य में सरकार की मदद की है, शायद अब आपका मन कर रहा होगा कि नहीं की तो नहीं। हो सकता है कि आपने सरकार का सहयोग किया हो, लेकिन अधिकतर लोगों ने सरकार के खिलाफ आवाज उठाने में माहिर हैं, लेकिन सरकार का सहयोग करने की जरा सी भी हिम्मत नहीं है।
कोई भी समस्या हो हम सरकार से उसका हल एक ही पल में चाहते हैं, जबकि कोई भी कार्य बिना प्रोसैसिंग के पूरा नहीं हो सकता है। लेकिन आजाद भारत मेें भारतीयों की मानसिकता मोदी सरकार के आने के बाद इतनी सक्रिय हो गई है कि हर समस्या का हल हम एक पल में ही चाहते है। इसका बड़ा कारण यह रहा है कि जो भी कार्य किए उसके बारे में मीडिया के माध्यम से हमें जल्दी जानकारी मिल गई। अगर पुराने समय की तरह अगर किसी भी योजना के बारे में हमें (यानी आम लोगों को जो आज भी आर्थिक तौर पर समृद्ध नहीं हैं) सालों बाद पता चलता तो उसके बाद यह भी पता चलता है कि अमुक योजना को बंद हुए इतना समय हो गया है और अब इसमें इस तरह के कार्य नहीं हो सकते हैं।
लोगों को संदेश वाहक के रूप में मीडिया अगर किसी योजना की जानकारी तत्काल प्रभाव से नहीं देता तो शायद आज भी कई योजनाएं आती और चली जाती। हमें योजनाओं का पता ही नहीं चलता कि कब योजना बनी, कब लागू हुई और कब खत्म हो गई। अगर सरकार कोई योजना बना रही है तो उसमें आम लोगों की भलाई को देख रही है, चाहे वह कोई भी सरकार हो, चाहे कांग्रेस हो या फिर भाजपा, हमें योजनाओं के क्रियान्वयन का इंतजार करना चाहिए। उसके बाद जो कमियां हो उनको उजागर करके उनको दूर करने के लिए सरकार का साथ देना चाहिए। इसके साथ ही सरकार को भी योजनाओं का निर्माण करते समय आम लोगों की राय लेनी चाहिए कि आम लोगों की किसी भी योजना को लेकर क्या सोच है। किसी भी योजना को जनता पर थोपा नहीं जाना चाहिए।
अगर मीडिया हमें कोई जानकारी दे रही है तो आज हमें मीडिया का भी धन्यवाद करना चाहिए कि सरकार की नाकामियों और सफलताओं से हमें लगातार अपडेट कर रही है।
अगर जिंदगी को पहेली बनाया तो उलझते रहेंगे, अगर जिंदगी को सहेली बनाया तो सुलझते रहेंगे !!
भारतीयों की मानसिकता, कुछ भी हो अभी हो
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