तेरी यादों का सजा कर मेला
गली गली घूमे है रविन्द्र अकेला
मैं हूँ तेरा पगला सा दीवाना
हो लेता हूँ हर कहीं से रवाना
कई देख मुझे गले लगा लेते हैं
कई देख दर्द में मुस्कुरा लेते हैं
बस यही तो अपना किस्सा है
सुख-दुःख जीवन का हिस्सा है
कोई लाखों पाकर भी खुश नहीं
हमें कुछ ना पाकर भी दुःख नहीं
यहाँ नसीब तो अपना अपना है
कोई पूरा तो कुछ सिर्फ सपना है
गम न कर कि तुझे क्या मिला है
यह तो तेरे अधूरे प्यार का सिला है
करनी है गर दिली मोहब्बत रविन्द्र
बना ले दिल में उसके प्यार का मंदिर
अगर जिंदगी को पहेली बनाया तो उलझते रहेंगे, अगर जिंदगी को सहेली बनाया तो सुलझते रहेंगे !!
यादों का मेला
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें (Atom)
गांव और शहर में बंटी सियासत, चम्बा में BJP को डैमेज कंट्रोल करना बना चुनौती
हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए प्रत्याशियों के नामों की घोषणा की बाद भाजपा में बगावत के सुर तेज हो गए हैं। ऐसा ही कुछ हाल चम्बा जिला के...
-
डलहौज़ी हलचल (चम्बा) :- सच ही कहा है किसी ने की भगवान किसी को गरीब पैदा न करे और अगर गरीब पैदा करे तो उसे कोई बीमारी न दे. क्यूंकि इस स...
-
हिमाचल के मंडी जिले के सिराज विधानसभा क्षेत्र को प्रकृति ने सुंदरता का अपार भंडार बख्शा है। इसी विधानसभा क्षेत्र की ग्राम पंचायत मुराहग...
-
कल मैं विभिन्न न्यूज पोर्टल पर एक समाचार पढ़ कर थोड़ा ठहर और सिहर-सा गया। अधिकतर पोर्टलों में यही समाचार प्रमुखता के साथ प्रसारित हो रहा था...

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें