मेरी माँ बोली

अऊं ता गद्दी आ मूं इक गल बलणी
जेड़ी गल आ से तूसू जो बड़ी खलणी

सुणा अज रोऊ करदी आ मेरी माँ बोली
अपणा बजूद खोऊ करदी मेरी माँ बोली

तुसे भी ता तड़क भड़क अपणाई लेई आ
गद्दी छड़ी हिन्दी, अंग्रेजी गले लाई लेई आ

पंजाबी बली तुसे अपणा सम्मान दिखदै
अपणी बोली भाषा गद्दी कजो ना सिखदे

मौता रे नेड़ै पुजी गेई अज मेरी माँ बोली
बैई कोणै मंज रोऊ करदी मेरी माँ बोली

अज ना ता फिरी कणे माँ जोगी गले लाणा
माँ जो ना छड़दे तियां बोली छड़ी करा गणा

बच्चे जोगी दस्सू करा गद्दी मंज गल करणा
गल करी गद्दी मंज माँ ने कदी भी ना मरणा

मेरे तांई ता सब कुछ आ ए मेरी माँ बोली
अपणा बजूद खोऊ करदी मेरी माँ बोली

अधूरी है......

1 टिप्पणी:

सुरेश भारद्वाज निराश ने कहा…

बड़ी बाँकी रचना। ...बधाई।

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