ऐ मेरे खुदा कभी जमीं पर आके तो देख
कितनी मासूस बच्चियों से हो रहा है रेप
कितनी मासूस बच्चियों से हो रहा है रेप
एक मासूम इतने नाज से थी घर में पली
दंरिदे! क्यों कुचलते है तेरे बाग की कली
दंरिदे! क्यों कुचलते है तेरे बाग की कली
जो मासूम पापा की प्यारी मां की दुलारी
उसपे दरिंदे निकाल रहे हवस अपनी सारी
उसपे दरिंदे निकाल रहे हवस अपनी सारी
खुदा तेरी सृष्टि को ये किसकी नजर लगी
मासूम देख ही क्यों दरिंदों की हवस जगी
मासूम देख ही क्यों दरिंदों की हवस जगी
लगे, तेरी नजर भी अब कुछ हो गई खोटी
दरिंदों को माफ करने की ली है रिश्वत मोटी
दरिंदों को माफ करने की ली है रिश्वत मोटी
कभी तो तू भी अपने किए पर पछताएगा
डरे हैं सभी बेटी को कौन संसार में लाएगा
डरे हैं सभी बेटी को कौन संसार में लाएगा
सब तेरा किया है या सृष्टि का अंत आ गया
सुन हैवानी की बातें, आंखों में लहू आ गया
सुन हैवानी की बातें, आंखों में लहू आ गया
'रविन्द्र' नहीं देख सकता मासूम से होता रेप
तभी पुकारूं खुदा, जमीन पर आके तो देख
तभी पुकारूं खुदा, जमीन पर आके तो देख


कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें