संसद में संग्राम

आखिर क्यों रोज संसद में संग्राम है,
क्या? यही सत्तापक्ष-विपक्ष का काम है।
नीति लागू करने संसद में रोज हंगामे
क्या ? यही सरकारी विकास का नाम है।।


पक्ष क्या चाहता है कि विपक्ष की राय?
नहीं यहां तो उन्हें शोर-शराबे का काम है।
लोकतंत्र का मंदिर कहा जाता है जिसे
आज भारत की पूज्य संसद बदनाम है।।


बहुमत से बनी है यहां तो अपनी सरकार
सत्तापक्ष को अपने पर आज ये गुमान है।
आम-गरीबों की किस्मत ही फूटी हो जहां
वहां पर सरकारों को कोसने का काम है।।

हर नेता यहां अपने सत्ता सुख की सोचे
क्या है जो आम जनता बड़ी परेशान है।
सत्ता में आकर भूल जाते हैं चाचा-मामा 'रविन्द्र'
कुछ न करें नेता तो भी जनता में नाम है।।

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