मन है उदास

मन है उदास

दिल कह रहा है
कि लिखूं दिल की बात
बात पूरी नहीं हो रही कोई
मुझे लग रहा है आत्मा है सोई
मन है उदास ।।

बार-बार लिखता हूँ
फिर उसको मिटा रहा 
हूँ
भीतर खुद को खा रहा हूँ
लो फिर कुछ है लिखा मिटा दिया
यह मैं क्या किए जा रहा हूँ
मन है उदास ।।
कुछ विचार आया मन में
सुस्ती आ गई मेरे तन में
कभी यहां है आत्मा मेरी तो देखा
कहीं भटक रही है सुनसान से वन में
मन है उदास. ।।
लोग देख रहे हैं चेहरा मेरा
दिल में कर लिया है, चिंताओं ने डेरा
फिर वही ख्याल आया, मेरे तन्हां दिल में
आखिर कविता ने बोल ही दिया
कुछ तो ख्याल कर अब रविन्द्र मेरा
मन है उदास ।।

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