अब तो यह दहशत मंजूर नहीं है, कार्रवाई करो पाक इतना भी दूर नहीं है

भारत विरोध ने पाकिस्तान को उन्माद से ग्रस्त कर दिया है और उन्माद से भरे किसी भी देश से सभ्य राष्ट्र की तरह से व्यवहार की अपेक्षा करना एक तरह से समय को जाया करना ही है। यह पागलपन के अलावा और कुछ नहीं कि पाकिस्तान ने 2016 में 228 बार संघर्ष विराम का उल्लंघन किया तो 2017 में 860 बार। इस साल वह बीते चंद दिनों में ही 240 बार संघर्ष विराम का उल्लंघन कर चुका है। साफ है कि उसके होश ठिकाने पर नहीं। पाकिस्तान के होश ठिकाने लगाने के लिए भारत को सख्त कदम उठाने की अावश्यकता है।

भारतीय सीमा के अंदर जम्मू-कश्मीर में पाकिस्तानी सेना के गाइडेड मिसाइल के हमले में एक सैन्य अधिकारी और तीन भारतीय सेना के जवानों की शहादत देश के लिए एक बड़ा आघात है। पाकिस्तान के इस हमले को न तो नजरअंदाज किया जा सकता है और न ही पूर्व के हमलों को और न ही भारतीय जवानों की शहादत को किसी भी कीमत पर भुलाया जा सकता है। पाकिस्तान की गुस्ताखी और पागलपन की गवाही देने वाली पूर्व की घटनाओं की तरह इस घटना ने फिर वही सवाल खड़ा कर दिया है जम्मू-कश्मीर में तैनात सुरक्षाबलों के जवानों की शहादत का सिलसिला कब तक जारी रहेगा और कब तक भारतीय जवान शहीद होते रहेंगे।


यह ठीक है कि सरकार से लेकर सेना तक ने भी यह साफ कर दिया है कि पाकिस्तान को भारतीय जवानों के शहादत की कीमत चुकानी ही पड़ेगी। सरकार और सेना की इस प्रतिक्रिया से पूरी तरह आशवस्त हो सकते है कि भारतीय सेना अपने साथियों की शहादत का पाकिस्तान से हर हाल में बदला लेगी, लेकिन सवाल यह है कि क्या इससे पाकिस्तान की ओर से संघर्ष विराम के उल्लंघन और आतंकियों की घुसपैठ करवाने का सिलसिला भी थमेगा? इस सवाल का सही जवाब तब मिलेगा जब कुछ ऐसा किया जाएगा जिससे पाकिस्तान अपनी गुस्ताखी भरी और पागलपन वाली हरकतों के लिए अच्छी खासी कीमत चुकाएगा। यह भी सही है कि पाकिस्तानी सेना जब भी संघर्ष विराम का उल्लंघन करती है तो उसे भारतीय सेना द्वारा मुंहतोड़ जवाब दिया जाता है, लेकिन यह कहना कठिन है कि भारतीय सेना की आक्रामकता से पाकिस्तान की सेहत पर कोई खास असर पड़ता है, वह तो भारतीय सेना की कड़ी कार्रवाई के बाद फिर से अपनी उसी हरकत पर आ जाता है। सबको पता है कि पाकिस्तान भारतीय सेना की कार्रवाई से होने वाली क्षति को दबाने-छिपाने में माहिर है। वह भारतीय कार्रवाई से होने वाली क्षति की खबरों को कभी सार्वजनिक नहीं करता है, जबकि भारत पाक की गोलाबारी के कारण एक आम नागरिक से लेकर सेना को भी किसी तरह के होने वाले नुकसान से पूरे भारत को अवगत करवाता है। पाकिस्तान द्वारा उसको भारतीय सेना की कार्रवाई में हुए नुकसान को छुपाने से इन्कार करने का सबूत यह है कि गत वर्ष भारतीय सेना द्वारा सीमा पार की गई सर्जिकल स्ट्राइक को भी पूरी तरह से नाकार दिया था। और कहा था कि भारतीय सेना ने उस पर कोई सर्जिकल स्ट्राइक की ही नहीं थी।


नि:संदेह सर्जिकल स्ट्राइक के माध्यम से भारतीय सेना पाकिस्तान और विश्व को यह संदेश देने में सक्षम हुई थी, लेकिन पाकिस्तान से लगती नियंत्रण रेखा और सीमा रेखा के हालात यही बताते हैं कि पाकिस्तान ने जरूरी सबक नहीं सीखा। संघर्ष विराम के उल्लंघन के साथ ही सीमा पार से घात लगाकर किए जाने वाले हमलों की संख्या जिस तरह बढ़ रही है, उन हालातों में सीमा के हालातों को सामान्य नहीं कहा जा सकता है। सीमा पर पाक की गोलाबारी के साथ कश्मीर को लेकर पाकिस्तान का उन्माद बढ़ता जा रहा है। पाकिस्तान कश्मीर की स्थिति को खराब करने के वहां अलगाववादियों का समर्थन कर रहा है। सीमा पर जहां सैनिकों पर गोलाबारी की जा रही है तो कश्मीर में भी सेना के जवानों और कैंपों पर पत्थरबाजी करवाई जा रही है। दोनों ओर से भारतीय सेना के साहस को डिगाने की कोशिश पाकिस्तान द्वारा की जा रही है। अब स्थिति यह है कि भारत को पाक पर नए सिरे से कठोर प्रहार करके उसे सख्त सबक सिखाना चाहिए, ताकि भविष्य में पाक इस तरह की नापाक हरकतें करने से पहले हजार बार सोचे की इसका अंजाम क्या होगा। भारत को बार-बार अपनी शांति बहाली के प्रयासों से पीछे हटकर इन नापाक हरकतों का सैन्य कार्रवाई के माध्यम से कठोर जबाव देना चाहिए।


पिछले तीन सालों जिस तरह से पाकिस्तान कार्रवाई कर रहा है, उसे तो यही कहा जा सकता है कि जिस तरह से अमेरिका द्वारा उत्तर कोरिया को परमाणु परीक्षण करने पर चेताया जा रहा, लेकिन वह अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा है, ठीक यहीं स्थिति भारत की चेतावनियों के पाकिस्तान अपनाए हुए है। पाकिस्तान को बार-बार चेताना या फिर उसके राजनयिकों को तलब कर उनके समक्ष विरोध जताना व्यर्थ की कवायद है। भारत विरोध ने पाकिस्तान को उन्माद से ग्रस्त कर दिया है और उन्माद से भरे किसी भी देश से सभ्य राष्ट्र की तरह से व्यवहार की अपेक्षा करना एक तरह से समय को जाया करना ही है। यह पागलपन के अलावा और कुछ नहीं कि पाकिस्तान ने 2016 में 228 बार संघर्ष विराम का उल्लंघन किया तो 2017 में 860 बार। इस साल वह बीते चंद दिनों में ही 240 बार संघर्ष विराम का उल्लंघन कर चुका है। साफ है कि उसके होश ठिकाने पर नहीं। पाकिस्तान के होश ठिकाने लगाने के लिए भारत को सख्त कदम उठाने की अावश्यकता है।

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