सज्जन रे...

क्यों देते हो तुम मुझे वेदना
क्यों चाहे हो जख्म कुरेदना
आखिर क्या मिलेगा तुमको
जो शुरू किया दिल छेदना

ये प्यार का जख्म गहरा है
हर ओर वेदना का पहरा है
कहां खोज करूं सजन को
पता नहीं वो कहां ठहरा है

तलाश शुरू की थी दहलीज से
अब पहुंचे हैं जादुई ताबीज पे
पहचान करूं भी तेरी तो कैसे
देखा नहीं कभी तुझे करीब से

तेरी खुशबू ने बनाया था दीवाना
मिले नहीं तुम ढूंढ मारा जमाना
खैर प्यार है तुमसे हमको सज्जन
अब जल भी सकता है ये परवाना।।

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