जिला कांगडा के जगजीवन राम कौंडल उर्फ जग्गू नौरिया नाम काफी चर्चा में है। वह वो शख्स हैं जिन्होंने समाज सुधार के कार्य करने के लिए लाखों रूपए की नौकरी छोड़ दी और जुट गए सामाजिक कार्यों में। जगजीवन राम नाम से लगता है कि इस नाम को धारण करने वाला व्यक्तित्व कोई आम नहीं है। जगजीवन राम से ही समझा जा सकता है कि जग को जीवन देने वाले भगवान राम के समान ही कोई सुधार की जिज्ञासा रखने वाला व्यक्ति है। भगवान राम के रूप में जन्म लेने से पहले भगवान शिव की पूरी योजना थी कि किस तरह से समाज में फैली कुरीतियों को दूर किया जा सकता है। उसके आधार पर उन्होंने पूरी योजना के साथ राजा दशरथ के घर में जन्म लिया और फिर समाज में उस दौरान फैली बुराइयों को दूर किया। उसी प्रकार मैं जगजीवन राम कौंडल उर्फ जग्गू नौरिया को भी देख रहा हूं। अपने समाज में फैली बुराईयों के खिलाफ इन्होंने जो आवाज उठाई है प्रशंसा के योग्य हैं।
उन्होंने अपनी नौकरी छोड़ कर समाज के उत्थान के लिए जो कार्य शुरू किए हैं उनमें सबसे पहली बात यह है कि उन्होंने गांव के बच्चों को इकट्ठा करके उनमें मानसिक परिवर्तन लाया है कि वह आज एक समझदार इन्सान हैं। उन्होंने बच्चों के लिए एक शिक्षण संस्थान का प्रबंध किया हैं जहां बच्चों को सामाजिक बुराईयों के खिलाफ जागरूक किया जा रहा है। स्कूलों में जाकर बच्चों को जागरूक किया जा रहा है। वहीं समाज में जरूरतमंद लोगों को आर्थिक तौर भी सहायता उपलब्ध करवा रहे है। कुल मिलाकर देखा जाए तो समाज जुड़ हर कार्य में अपना योगदान दे रहे हैं। उनके इन कार्यों को देखकर कई राजनीतिज्ञ यह कह रहे हैं कि वह राजनीति में आने के लिए इस तरह कार्य कर रहे हैं, लेकिन वह राजनीति में आने के लिए तैयार नहीं हैं। वह सामाजिक कार्यों को समाज में रह कर ही करना चाहते हैं। कई राजनेताओं के लिए वह चुनौती बन गए हैं।
कांगडा के नगरोटा बगवां के नौरा टीका गांव के रहने वाले जग्गू नौरिया मैक्सिमा रिस्ट बाॅच कंपनी में मैनेजर के पद कार्यरत थे। अच्छी खासी नौकरी करते करते वह आशुतोष महाराज के संपर्क में आए जहां से वह आध्यात्मिक क्षेत्र से जुड़े। नौकरी कर रहे थे अच्छा खासा वेतन मिलता था, लेकिन फिर भी नौकरी छोड़ दी। कारण था कि समाज के लिए कर गुजरने का जज्बा। जज्बा उनको ऐसा कि 2015 में नौकरी छोड़ने के बाद वह अपने पैतृक गांव आए गए और जुट गए सामाजिक कार्यों में।
सामाजिक कार्यों की शुरूआत करते हुए उन्होंने सबसे पहले गांव में एक खेल के मैदान का निर्माण करवाया। इसके लिए उन्होंने जहां खुद संस्था से जुड़े लोगों का विशेष सहयोग लिया वहीं समाजसेवी संजय शर्मा का खास तौर सहयोग रहा है। हाल ही में 15 अगस्त को उन्होंने एक कार्यक्रम का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में जो उन्होंने कार्य किया वो किसी सम्मान से कम नहीं है। अगर आपको पता होगा तो यह बड़ी बात है। देश की रक्षा के लिए सीमा पर अपने प्राणों की आहुति देने वाले भारत के वीर जवानों के परिजनों को कोई सम्मान नहीं मिल पाता, लेकिन उन्होंने इस कार्यक्रम में एक शहीद जवान की विधवा विरांगना और बच्चियों को बतौर मुख्यातिथि आमंत्रित करके उनको सम्मानित किया। पूरे भारत में अपनी तरह का यह पहला कार्यक्रम होगा जहां शहीद की विधवा को मुख्यातिथि बुलावा मिला हो और उसके सम्मानित किया हो। खैर उनके द्वारा किए जा रहे सामाजिक कार्यों की लिस्ट इतनी लम्बी हैं कि उनको इसमें शामिल किया जाए तो एक किताब ही बन जाए। खैर बाकी सब छोड़कर आपको उनके साथ की गई बातचीत के कुछ अंश पेश कर रहा हूं।
प्रस्तुत हैं जगजीवन राम कौंडल उर्फ जग्गू नौरिया के साथ कुछ सवाल-जवाब...............
रविन्द्र कुमार अत्री
आप मैक्सिमा रिस्ट बाॅच कंपनी में मैनेजर पद क्यों छोड़ा?
जवाब-जग्गू नौरिया
समाज में बदलाव लाना जरूरी हो गया। आज का कोई भी युवा बुजुर्गों को लेकर एक्टिव नहीं था। समाज के नैतिक मूल्य का पतन हो रहा था। उन्हीं नैतिक मूल्यों को दोबारा से युवाओं में जागृति लाने की कोशिश है। सरकारी कार्यालयों में एक निठलापन आ गया था। कार्यालयों में आम लोगों के कार्यों को टाला जा रहा है। सरकारी योजनाओं में बंदरबांट कार्य हो रहे हैं। गरीबों को उनका हक नहीं मिल पा रहा है। लोगों को अपने के हकों के प्रति जागरूक करने के लिए ही यह सब निर्णय लिए गए थे।
रविन्द्र कुमार अत्री
क्या राजनीति में आने क्या विचार है?
जवाब-जग्गू नौरिया
मेरी राजनीति में आने की कोई इच्छा नहीं। मैं समाजसेवा के मकसद से ही अपनी नौकरी छोड़कर आया हूं। युवाओं को अपने कर्तव्यों के प्रति जागरूक कर रहा हूं। अगर युवा लोग राजनीति में आ जाते हैं तो एक अच्छे परिवर्तन की उम्मीद की जा सकती है। जहां पर राजनीति में आने की बात है तो राजनीति में आकर आदमी किसी पार्टी विशेष से जुड़कर उसके संविधान में बंध जाता है। और उससे वह सामाजिक कार्यों में अपना योगदान नहीं दे पाता है। मैं राजनीति से दूर ही रहूंगा।
रविन्द्र कुमार अत्री
युवाओं को लेकर क्या कर रहें?
जवाब-जग्गू नौरिया
आज का युवा नशे की ओर आकर्षित हो रहे हैं। इसका कारण यह है कि सरकार ने युवाओं के लिए सार्वजनिक तौर पर खेलों में प्रोत्साहित करने के लिए कोई साकारात्मक कदम नहीं उठाए है। मैंने आपने गांव के युवाओं को इससे बचाने के लिए एक एनजीओ का गठन करके आम लोगों से धन इकठृा करके एक खेल के मैदान का निर्माण किया है जहां रोजाना करीब 200 युवक-युवतियां आकर अपना अभ्यास करते हैं। मेरा मानना है कि जब युवा खेलों की आकर्षित होगा तो नशे के दलदल में फंसने से काफी हद तक बच जाएगा।
रविन्द्र कुमार अत्री
आज की राजनीति में आपको कोई बुराई नजर आती है?
जवाब-जग्गू नौरिया
आज की जो राजनीति राजनीति नहीं रही है। राजनीति के मायने बदल चुके हैं। राजनीति में आकर हर कोई अपने बारे में सोच रहा है। हाल ही मैं प्रदेष सरकार ने विधायकों व पूर्व विधायकों के लिए शिमला में सस्ते दामों पर जमीन उपलब्ध करवाने का निर्णय लिया है। तो यह कैसी राजनीति हुई। राजनीति वह होती है, जिसमें आम लोगों की सुविधाओं के लिए नियम कानून बनाए जाते हैं, लेकिन वर्तमान में सरकार सिर्फ अपने फायदों को देखकर ही नियम कानून बना रही है। राजनीति में जनता के हित में हित में फैसले लिए जाते हैं जनता को सुविधाएं दी जाती हैं लेकिन अब तो सिर्फ अपने फायदे के फैसले लिए जा रहे हैं, तो यह कैसी राजनीति हुई। मुझे नहीं लगता है कि यह राजनीति है।
रविन्द्र कुमार अत्री
आजकल हर कोई कह रहा है कि मैं राजनीति में समाजसेवा के लिए आ रहा हूँ?
जवाब-जग्गू नौरिया
नहीं यह ऐसा नहीं है। जो यह कहते हैं उनका यह जनता के साथ छलावा है। जो ऐसा कहते हैं उनके साथ मेरा सवाल है कि उनके पास ऐसी कौन सी जादू की छड़ी है जो सिर्फ राजनीति में आकर ही समाजसेवा करती है। समाज सेवा के लिए राजनीति में जाना जरूरी नहीं है। आज के दौर यह देखना आम बात है कि जब कोई एक बुजुर्ग व्यक्ति रोड पार कर रहा हो और सामने से किसी राजनेता का काफिला गुजर रहा हो तो घंटों ट्रैफिक को रोक दिया जाता है। कभी किसी राजनेता ने किसी बुजुर्ग व्यक्ति को रोड पार करवाई हो तो वो बताएं कि उन्होंने समाजसेवा की है।
रविन्द्र कुमार अत्री
युवाओं को राजनीति में भाग लेना चाहिए?
जवाब-जग्गू नौरिया
बिलकुल लेना चाहिए। जब युवा राजनीति में आएंगे और पढे लिखे होंगे तो वह समाज में परिवर्तन ला सकते हैं। जब जब भी कोई नया परिवर्तन या क्रांति आई है तो उसमें युवाओं का ही योगदान रहा है। चाहे आजादी के समय में भगत सिंह, राजगुरू व सुखदेव सिंह सभी युवा थे जिन्होंने अपने प्राणों की आहुति देकर आजादी की क्रांति में अहम योगदान दिया है। आज के परिदृष्य को देखकर यही लगता है कि जब तक युवा राजनीति में नहीं आएगा तो देश का उत्थान या देश में परिवर्तन संभव नहीं है।
रविन्द्र कुमार अत्री
महिला वर्ग के लिए आपकी क्या सोच है?
जवाब-जग्गू नौरिया
महिला वर्ग के लिए सरकार ने कई योजनाएं शुरू की हुईं हैं, लेकिन धरातल पर महिलाओं को कुछ भी हासिल नहीं हो रहा है। महिलाओं को राजनीति पार्टियों द्वारा सिर्फ राजनीतिक तौर पर वोट बैंक में रूप में प्रयोग किया जा रहा है। जहां तक महिलाओं को सुविधाएं देने की बात आती है तो यह सब भेदभाव पूर्ण है। आजादी के सात दशक गुजर जाने के बाद भी सार्वजनिक शौचालयों में पुरूषों को मुफ्त लेकिन महिलाओं को शौच के भी पैसे देने पड़ते हैं। महिलाओं को इसके प्रति भी जागरूक किया जा रहा है।
रविन्द्र कुमार अत्री
ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों के लिए क्या योगदान रहेगा?
जवाब-जग्गू नौरिया
ग्रामीणों क्षेत्रों के बच्चों के लिए एक अकादमी खोलने की योजना है जहां बच्चों को उनके मूल्यों और कर्तव्यों के बारे में बताया जाएगा। उनको इस तरह से परिपक्वा बनाया जाएगा कि वह समाज में परिवर्तन लाने की हिम्मत रखते हों। सरकार की ऐसी योजनाएं भी हैं लेकिन वह धरातल में काम नहीं कर पा रही हैं उन योजनाओं के बारे में भी लोगों को जागरूक कर रहे है।
उन्होंने अपनी नौकरी छोड़ कर समाज के उत्थान के लिए जो कार्य शुरू किए हैं उनमें सबसे पहली बात यह है कि उन्होंने गांव के बच्चों को इकट्ठा करके उनमें मानसिक परिवर्तन लाया है कि वह आज एक समझदार इन्सान हैं। उन्होंने बच्चों के लिए एक शिक्षण संस्थान का प्रबंध किया हैं जहां बच्चों को सामाजिक बुराईयों के खिलाफ जागरूक किया जा रहा है। स्कूलों में जाकर बच्चों को जागरूक किया जा रहा है। वहीं समाज में जरूरतमंद लोगों को आर्थिक तौर भी सहायता उपलब्ध करवा रहे है। कुल मिलाकर देखा जाए तो समाज जुड़ हर कार्य में अपना योगदान दे रहे हैं। उनके इन कार्यों को देखकर कई राजनीतिज्ञ यह कह रहे हैं कि वह राजनीति में आने के लिए इस तरह कार्य कर रहे हैं, लेकिन वह राजनीति में आने के लिए तैयार नहीं हैं। वह सामाजिक कार्यों को समाज में रह कर ही करना चाहते हैं। कई राजनेताओं के लिए वह चुनौती बन गए हैं।
कांगडा के नगरोटा बगवां के नौरा टीका गांव के रहने वाले जग्गू नौरिया मैक्सिमा रिस्ट बाॅच कंपनी में मैनेजर के पद कार्यरत थे। अच्छी खासी नौकरी करते करते वह आशुतोष महाराज के संपर्क में आए जहां से वह आध्यात्मिक क्षेत्र से जुड़े। नौकरी कर रहे थे अच्छा खासा वेतन मिलता था, लेकिन फिर भी नौकरी छोड़ दी। कारण था कि समाज के लिए कर गुजरने का जज्बा। जज्बा उनको ऐसा कि 2015 में नौकरी छोड़ने के बाद वह अपने पैतृक गांव आए गए और जुट गए सामाजिक कार्यों में।
सामाजिक कार्यों की शुरूआत करते हुए उन्होंने सबसे पहले गांव में एक खेल के मैदान का निर्माण करवाया। इसके लिए उन्होंने जहां खुद संस्था से जुड़े लोगों का विशेष सहयोग लिया वहीं समाजसेवी संजय शर्मा का खास तौर सहयोग रहा है। हाल ही में 15 अगस्त को उन्होंने एक कार्यक्रम का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में जो उन्होंने कार्य किया वो किसी सम्मान से कम नहीं है। अगर आपको पता होगा तो यह बड़ी बात है। देश की रक्षा के लिए सीमा पर अपने प्राणों की आहुति देने वाले भारत के वीर जवानों के परिजनों को कोई सम्मान नहीं मिल पाता, लेकिन उन्होंने इस कार्यक्रम में एक शहीद जवान की विधवा विरांगना और बच्चियों को बतौर मुख्यातिथि आमंत्रित करके उनको सम्मानित किया। पूरे भारत में अपनी तरह का यह पहला कार्यक्रम होगा जहां शहीद की विधवा को मुख्यातिथि बुलावा मिला हो और उसके सम्मानित किया हो। खैर उनके द्वारा किए जा रहे सामाजिक कार्यों की लिस्ट इतनी लम्बी हैं कि उनको इसमें शामिल किया जाए तो एक किताब ही बन जाए। खैर बाकी सब छोड़कर आपको उनके साथ की गई बातचीत के कुछ अंश पेश कर रहा हूं।
प्रस्तुत हैं जगजीवन राम कौंडल उर्फ जग्गू नौरिया के साथ कुछ सवाल-जवाब...............
रविन्द्र कुमार अत्री
आप मैक्सिमा रिस्ट बाॅच कंपनी में मैनेजर पद क्यों छोड़ा?
जवाब-जग्गू नौरिया
समाज में बदलाव लाना जरूरी हो गया। आज का कोई भी युवा बुजुर्गों को लेकर एक्टिव नहीं था। समाज के नैतिक मूल्य का पतन हो रहा था। उन्हीं नैतिक मूल्यों को दोबारा से युवाओं में जागृति लाने की कोशिश है। सरकारी कार्यालयों में एक निठलापन आ गया था। कार्यालयों में आम लोगों के कार्यों को टाला जा रहा है। सरकारी योजनाओं में बंदरबांट कार्य हो रहे हैं। गरीबों को उनका हक नहीं मिल पा रहा है। लोगों को अपने के हकों के प्रति जागरूक करने के लिए ही यह सब निर्णय लिए गए थे।
रविन्द्र कुमार अत्री
क्या राजनीति में आने क्या विचार है?
जवाब-जग्गू नौरिया
मेरी राजनीति में आने की कोई इच्छा नहीं। मैं समाजसेवा के मकसद से ही अपनी नौकरी छोड़कर आया हूं। युवाओं को अपने कर्तव्यों के प्रति जागरूक कर रहा हूं। अगर युवा लोग राजनीति में आ जाते हैं तो एक अच्छे परिवर्तन की उम्मीद की जा सकती है। जहां पर राजनीति में आने की बात है तो राजनीति में आकर आदमी किसी पार्टी विशेष से जुड़कर उसके संविधान में बंध जाता है। और उससे वह सामाजिक कार्यों में अपना योगदान नहीं दे पाता है। मैं राजनीति से दूर ही रहूंगा।
रविन्द्र कुमार अत्री
युवाओं को लेकर क्या कर रहें?
जवाब-जग्गू नौरिया
आज का युवा नशे की ओर आकर्षित हो रहे हैं। इसका कारण यह है कि सरकार ने युवाओं के लिए सार्वजनिक तौर पर खेलों में प्रोत्साहित करने के लिए कोई साकारात्मक कदम नहीं उठाए है। मैंने आपने गांव के युवाओं को इससे बचाने के लिए एक एनजीओ का गठन करके आम लोगों से धन इकठृा करके एक खेल के मैदान का निर्माण किया है जहां रोजाना करीब 200 युवक-युवतियां आकर अपना अभ्यास करते हैं। मेरा मानना है कि जब युवा खेलों की आकर्षित होगा तो नशे के दलदल में फंसने से काफी हद तक बच जाएगा।
रविन्द्र कुमार अत्री
आज की राजनीति में आपको कोई बुराई नजर आती है?
जवाब-जग्गू नौरिया
आज की जो राजनीति राजनीति नहीं रही है। राजनीति के मायने बदल चुके हैं। राजनीति में आकर हर कोई अपने बारे में सोच रहा है। हाल ही मैं प्रदेष सरकार ने विधायकों व पूर्व विधायकों के लिए शिमला में सस्ते दामों पर जमीन उपलब्ध करवाने का निर्णय लिया है। तो यह कैसी राजनीति हुई। राजनीति वह होती है, जिसमें आम लोगों की सुविधाओं के लिए नियम कानून बनाए जाते हैं, लेकिन वर्तमान में सरकार सिर्फ अपने फायदों को देखकर ही नियम कानून बना रही है। राजनीति में जनता के हित में हित में फैसले लिए जाते हैं जनता को सुविधाएं दी जाती हैं लेकिन अब तो सिर्फ अपने फायदे के फैसले लिए जा रहे हैं, तो यह कैसी राजनीति हुई। मुझे नहीं लगता है कि यह राजनीति है।
रविन्द्र कुमार अत्री
आजकल हर कोई कह रहा है कि मैं राजनीति में समाजसेवा के लिए आ रहा हूँ?
जवाब-जग्गू नौरिया
नहीं यह ऐसा नहीं है। जो यह कहते हैं उनका यह जनता के साथ छलावा है। जो ऐसा कहते हैं उनके साथ मेरा सवाल है कि उनके पास ऐसी कौन सी जादू की छड़ी है जो सिर्फ राजनीति में आकर ही समाजसेवा करती है। समाज सेवा के लिए राजनीति में जाना जरूरी नहीं है। आज के दौर यह देखना आम बात है कि जब कोई एक बुजुर्ग व्यक्ति रोड पार कर रहा हो और सामने से किसी राजनेता का काफिला गुजर रहा हो तो घंटों ट्रैफिक को रोक दिया जाता है। कभी किसी राजनेता ने किसी बुजुर्ग व्यक्ति को रोड पार करवाई हो तो वो बताएं कि उन्होंने समाजसेवा की है।
रविन्द्र कुमार अत्री
युवाओं को राजनीति में भाग लेना चाहिए?
जवाब-जग्गू नौरिया
बिलकुल लेना चाहिए। जब युवा राजनीति में आएंगे और पढे लिखे होंगे तो वह समाज में परिवर्तन ला सकते हैं। जब जब भी कोई नया परिवर्तन या क्रांति आई है तो उसमें युवाओं का ही योगदान रहा है। चाहे आजादी के समय में भगत सिंह, राजगुरू व सुखदेव सिंह सभी युवा थे जिन्होंने अपने प्राणों की आहुति देकर आजादी की क्रांति में अहम योगदान दिया है। आज के परिदृष्य को देखकर यही लगता है कि जब तक युवा राजनीति में नहीं आएगा तो देश का उत्थान या देश में परिवर्तन संभव नहीं है।
रविन्द्र कुमार अत्री
महिला वर्ग के लिए आपकी क्या सोच है?
जवाब-जग्गू नौरिया
महिला वर्ग के लिए सरकार ने कई योजनाएं शुरू की हुईं हैं, लेकिन धरातल पर महिलाओं को कुछ भी हासिल नहीं हो रहा है। महिलाओं को राजनीति पार्टियों द्वारा सिर्फ राजनीतिक तौर पर वोट बैंक में रूप में प्रयोग किया जा रहा है। जहां तक महिलाओं को सुविधाएं देने की बात आती है तो यह सब भेदभाव पूर्ण है। आजादी के सात दशक गुजर जाने के बाद भी सार्वजनिक शौचालयों में पुरूषों को मुफ्त लेकिन महिलाओं को शौच के भी पैसे देने पड़ते हैं। महिलाओं को इसके प्रति भी जागरूक किया जा रहा है।
रविन्द्र कुमार अत्री
ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों के लिए क्या योगदान रहेगा?
जवाब-जग्गू नौरिया
ग्रामीणों क्षेत्रों के बच्चों के लिए एक अकादमी खोलने की योजना है जहां बच्चों को उनके मूल्यों और कर्तव्यों के बारे में बताया जाएगा। उनको इस तरह से परिपक्वा बनाया जाएगा कि वह समाज में परिवर्तन लाने की हिम्मत रखते हों। सरकार की ऐसी योजनाएं भी हैं लेकिन वह धरातल में काम नहीं कर पा रही हैं उन योजनाओं के बारे में भी लोगों को जागरूक कर रहे है।


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