पहले गरीबों पर अत्याचार, पर अब माननीयों से प्यार। तेरी चली चालें भी हैं निराली, वाह ! रे हिमाचल सरकार

आपको याद होगा पिछले 5 वर्षों में कितने लोगों के घर उजाड़ दिए थे। हां हां... हिमाचल प्रदेश के विभिन्न जिलों की बात कर रहा हूँ। जब हाईकोर्ट के आदेशों के बाद प्रदेश सरकार के राजस्व विभाग व वन विभाग मिलकर कार्रवाई करते हुए पूरे प्रदेश में अवैध कब्जा हटाने का अभियाना चलाया था। कितनों के घर सिर्फ इसलिए उजाड़ दिए क्योंकि उनके घर का एक कोना सरकारी भूमि में आ गया था। चाहे फिर वो मात्र 2 फुट की चौड़ाई का एरिया ही क्यों न हो? खूब जे.सी.बी. मशीनें चलीं। गरीबों के बने बनाए घर गिरा दिए गए हालांकि जिन लोगों के घरों का कोना भी सरकारी भूमि पर था उनको नोटिस देकर समय सीमा दी गई थी कि इतने समय में इस जमीन को खाली करना होगा नहीं तो राशन, बिजली व पानी बंद कर दिया जाएगा। आनन-फानन में लोगों ने नए घर के काम की शुरुआत तो कर दी, परंतु एक आशियाना बनाने में कितना समय लगता है। यह तो सब जानते हैं। नोटिस में सख्त लहजे से चेतावनी दी गई थी कि 3 महीने या 6 महीनें अवैध कब्जे यानी जो घर का कोना सरकारी भूमि पर आता था को नहीं हटाया गया तो उस पर जे.सी.बी. चला दी जाएगी। फिर ऐसा ही हाल सेब के बगीचों वाली भूमि का था। जहां सेब के बगीचे थे वहां पर सरकार ने हरे भरे सेब के पेड़ों पर आरी-कुल्हाड़ी चला दी, ताकि अवैध कब्जे को हटाया जा सके। प्रदेश में शुरू हुए अवैध कब्जा हटाओ अभियान के दौरान कई लोगों को आर्थिक तौर पर नुक्सान का जहां सामना करना पड़ा वहीं मानसिक तौर पर भी परेशानी हुई।



पहले गरीबों पर अत्याचार, पर अब माननीयों से प्यार। 
तेरी चली चालें भी हैं निराली, वाह! रे हिमाचल सरकार।।

सरकार के आदेश के बाद लोगों ने जैसे तैसे करके अपने बने बनाए आशियानों को गिरा कर नए आशियाने बनाए। बना बनाया आशियाना गिराते वक्त उनके दिल में क्या गुजरी होगी यह तो वही लोग जानते हैं, लेकिन क्या करें उन्होंने कानून का पालन भी तो करना था। गिरा दिए आशियाने। आंखों में बेशक आंसु थे लेकिन नए घर में रहने का सपना भी उनकी आंखों में आ गया। लेकिन जहां सेब के बगीचों पर आरी और कुल्हाड़ी चलाई गई वहां क्या?  लोगों ने अवैध कब्जा करके सेब के बगीचों को तैयार किया था, भारी मेहनत की थी, जब सेब के पेड़ों की फल देने की बारी आई तो हाईकोर्ट के आदेशों के बाद सरकार ने उन्हीं पेड़ों पर आरी चलाई। जो बागबान जल्द ही अमीर से सपने देखने लगे थे उनके सारे के सारे सपने धाराशायी हो गए।

चलो बीत गई तो वो बात गई अपने आशियानों को खोने वाले लोगों के लिए इस बात से तो सबक हो गया कि कभी भी अवैध कब्जा नहीं करना चाहिए नहीं तो बने बनाए आशियाने उजड़ जाएंगे। तो आखिर कहां जाएंगे। अब हिमाचल प्रदेश सरकार ने सोमवार को एक ऐसा फैसला लिया है कि वह अब अवैध कब्जा करने को प्रोत्साहित करने वाला है। सरकार ने विधायकों को जो वर्तमान हैं और पूर्व में रह चुके हैं, उनको अवैध कब्जा करने की छूट दे दी है। हिमाचल प्रदेश मंत्रिमंडल के फैसले के अनुसार विधायक अपने आस-पास कहीं भी 5 बीघा सरकारी जमीन देख ले, वहां पर कब्जा कर सकते हैं। सरकार ने उस कब्जे को नियमित भी कर देगी, ऐसी योजना बनाई है।

प्रदेश की लगभग 68 लाख जनसंख्या है और इस जनसंख्या का विधानसभा में 68 विधायक कर रहे हैं। अब सरकार के इस फैसले को किस तरह से समझें कि सरकार ने पहले प्रदेश भर में अवैध कब्जे हटाने के नाम पर जहां लोगों को बेघर कर दिया था तो अब क्यों सरकार अवैध कब्जों को प्रोत्साहित कर रही है। सरकार की यह दोहरी नीति है। अगर सरकार ने ऐसा करना था तो 4 साल पहले ही पॉलिसी बना देते जिन लोगों ने जहां-जहां अवैध कब्जे किए थे, वहां पर कब्जा दे देते। अगर ऐसा होता तो न तो सेब के हरे भरे पेड़ों को काटना पड़ता और न ही लोगों के बने बनाए आशियानों का उजाडऩा पड़ता। सरकार ने सिर्फ विधायकों को ही पट्टे पर जमीन देने का निर्णय क्यों लिया? प्रदेश में ऐसे कई परिवार हैं, जिनको रहने के लिए घर नहीं है। घर बनाने के लिए जमीन नहीं है, सरकार उनको भी जमीन देती तो अच्छा रहता। लेकिन सरकार चलाने वाले भी तो विधायक हैं और विधायकों के ही या फिर उनके चमचों और रिश्तेदारों के ही तो ज्यादातर अवैध कब्जे हैं तो फिर आम लोगों से उनको क्या? बना दी कथित समाज सेवियों ने अपने हितों के लिए पॉलिसी।

कोई टिप्पणी नहीं:

Powered By Blogger

गांव और शहर में बंटी सियासत, चम्बा में BJP को डैमेज कंट्रोल करना बना चुनौती

हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए प्रत्याशियों के नामों की घोषणा की बाद भाजपा में बगावत के सुर तेज हो गए हैं। ऐसा ही कुछ हाल चम्बा जिला के...