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| RAVINDER ATTRI |
हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह पिछले कुछ समय से अपने अजीब बयानों और व्यवहार के कारण चर्चा में हैं। कभी वो किसी समुदाय और जाति को आहत करने वाले बयान देते हैं तो कभी कुछ। अब 13 सितम्बर यानी बुधवार को मुख्यमंत्री ने अपने ही कैबिनेट यानी हिमाचल सरकार के मंत्री ठाकुर कौल सिंह द्वारा लाल रंग की टोपी पहनाने की कोशिश किए जाने पर उन्होंने टोपी को देखकर कर ही पहनने से मना कर दिया। उसके बाद जब मंत्री सम्मान के साथ सिर्फ हाथ में टोपी पहनने की बात करते हैं तो वह उसको हाथ में पकड़ कर एक-दो बार घुमा फिरा कर देखते हैं और फिर फैंक देते हैं जमीन पर। कितनी शर्म की बात हैं यह मैं नहीं कहूंगा क्योंकि वह हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री है और सभी के लिए आदरणीय हैं, लेकिन उनका यह व्यवहार किसी भी रूप से उचित नहीं है।3 बार लाल टोपी में शपथ का क्या?
मार्च 2017 में वीरभद्र सिंह ने बीजेपी पर टोपी की राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा था। मैंने तो शपथ भी तीन बार लाल रंग की टोपी में ली है। उन्होंने कहा था कि सबको सब रंग की टोपियां पहननी चाहिए। मगर बुधवार को हर कोई यह देखकर हैरान था कि क्षेत्रवाद की राजनीति न करने की बात करने वाले मुख्यमंत्री ने आखिर क्यों लाल रंग की टोपी पहनने से इनकार कर दिया और फिर उसे क्यों पटक दिया। पीछे खड़े लोग और मंच पर ही मौजूद केंद्रीय मंत्री नड्डा भी यह देखकर मुस्कुराते हुए हैरान रह गए।
सच दिखाओ-लिखो तो मीडिया को दलाल कहने से नहीं चूकते
अब हिमाचल में एक और नया ट्रेंड आ गया है। खास तौर पर कांग्रेस समर्थकों में। मैं कांग्रेस समर्थकों को इसलिए कह रहा हूं कि अगर किसी भी हिमाचली मीडिया ने कांग्रेस के नेताओं की असलियत को समाचार में दिखा दिया तो इस पर कांग्रेस के समर्थक पूरे मीडिया हाऊस को यही कहेंगे कि इस खबर को तैयार करने की कितनी दलाली खाई है। शर्म आती है मुझे ऐसे लोगों पर कि किसी सच्ची घटना को दिखाने के बाद मीडिया पर कांग्रेस के समर्थक इस तरह की टिप्पणी करते हैं। कई बार मैं भी इस शिकार हुआ हूं मैंने कई बार कांग्रेस और भाजपा के की सच्चाई जो लोगों के हित में नहीं थी को लिख दिया तो उस पर मुझे भी दलाल कहा गया। पहली बार जब मैंने वर्ष 2016 में 2 अक्तूबर को मेरे लिए भी इस तरह की टिप्पणियां हुईं। दरअसल हिमाचल प्रदेश के जिला चम्बा में कांग्रेस के एक नेता द्वारा राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को उनके जन्मदिन पर देश को प्रथम राष्ट्रपति संबोधित करते हुए एक विज्ञापन सोशल मीडिया पर जारी किया था। इसकी मैंने चम्बा उपायुक्त और पुलिस अधीक्षक को शिकायत भेजी थी कि राष्ट्रपिता को राष्ट्रपति बताकर उनके सम्मान को ठेस पहुंचाई गई है। इसकी कॉपी मैंने सोशल मीडिया पर अपलोड की थी, जिसके बाद मुझे यह भाजपा का दलाल कहा गया। अरे शर्म करो।
अब दूसरी बात हाल ही में जब 13 सितम्बर 2017 को मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने लाल रंग की टोपी को पहनने से इन्कार करते हुए फैंक दिया तो इन हिमाचल नाम की एक हिमाचल की समाचार बैवसाइट ने विक्रमादित्य और मुख्यमंत्री का एक वीडियो शेयर किया। इसमें विक्रमादित्य की वीडियो जनवरी 2017 की है, जिसमें वह कह रहे हैं कि टोपी कोई भी हो उसका सम्मान करना चाहिए और उन्होंने लाल रंग की टोपी पहनी है। जबकि दूसरे ओर मुख्यमंत्री का 13 सितम्बर 2017 का वीडियो है, जिसमें लाल रंग की टोपी पहनने से इन्कार करते हुए फैंक देते हैं। इस समाचार में बताया गया था कि आखिर कैसे बाप-बेटा एक दूसरे के खिलाफ ही हैं। इस पर भी कांग्रेस समर्थकों ने मीडिया को दलाली करने की बात कही। अरे शर्म करो।
अब हिमाचल में एक और नया ट्रेंड आ गया है। खास तौर पर कांग्रेस समर्थकों में। मैं कांग्रेस समर्थकों को इसलिए कह रहा हूं कि अगर किसी भी हिमाचली मीडिया ने कांग्रेस के नेताओं की असलियत को समाचार में दिखा दिया तो इस पर कांग्रेस के समर्थक पूरे मीडिया हाऊस को यही कहेंगे कि इस खबर को तैयार करने की कितनी दलाली खाई है। शर्म आती है मुझे ऐसे लोगों पर कि किसी सच्ची घटना को दिखाने के बाद मीडिया पर कांग्रेस के समर्थक इस तरह की टिप्पणी करते हैं। कई बार मैं भी इस शिकार हुआ हूं मैंने कई बार कांग्रेस और भाजपा के की सच्चाई जो लोगों के हित में नहीं थी को लिख दिया तो उस पर मुझे भी दलाल कहा गया। पहली बार जब मैंने वर्ष 2016 में 2 अक्तूबर को मेरे लिए भी इस तरह की टिप्पणियां हुईं। दरअसल हिमाचल प्रदेश के जिला चम्बा में कांग्रेस के एक नेता द्वारा राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को उनके जन्मदिन पर देश को प्रथम राष्ट्रपति संबोधित करते हुए एक विज्ञापन सोशल मीडिया पर जारी किया था। इसकी मैंने चम्बा उपायुक्त और पुलिस अधीक्षक को शिकायत भेजी थी कि राष्ट्रपिता को राष्ट्रपति बताकर उनके सम्मान को ठेस पहुंचाई गई है। इसकी कॉपी मैंने सोशल मीडिया पर अपलोड की थी, जिसके बाद मुझे यह भाजपा का दलाल कहा गया। अरे शर्म करो।
अब दूसरी बात हाल ही में जब 13 सितम्बर 2017 को मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने लाल रंग की टोपी को पहनने से इन्कार करते हुए फैंक दिया तो इन हिमाचल नाम की एक हिमाचल की समाचार बैवसाइट ने विक्रमादित्य और मुख्यमंत्री का एक वीडियो शेयर किया। इसमें विक्रमादित्य की वीडियो जनवरी 2017 की है, जिसमें वह कह रहे हैं कि टोपी कोई भी हो उसका सम्मान करना चाहिए और उन्होंने लाल रंग की टोपी पहनी है। जबकि दूसरे ओर मुख्यमंत्री का 13 सितम्बर 2017 का वीडियो है, जिसमें लाल रंग की टोपी पहनने से इन्कार करते हुए फैंक देते हैं। इस समाचार में बताया गया था कि आखिर कैसे बाप-बेटा एक दूसरे के खिलाफ ही हैं। इस पर भी कांग्रेस समर्थकों ने मीडिया को दलाली करने की बात कही। अरे शर्म करो।


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