सिर्फ बाबरी मस्जिद ही नहीं देश में कई और प्राचीन हिन्दू मन्दिर तोड़े गए हैं



गुजरात प्राचीन शिव मन्दिरों के लिए विख्यात रहा है। भगवान शिव को समर्पित 12वीं सदी का यह मंदिर सिद्धपुर, पाटन जिले गुजरात में स्थित है। यह भव्य मंदिर भगवान शिव के अवतार रुद्र अवतार को समर्पित किया गया हैं इस मंदिर की भव्य वास्तुकलाए बारीक खुदाई शिल्पकला एवं श्रेष्ठ कारीगरी की कला का उपयोग किया गया था।
भारतवर्ष के गौरवशाली राजा जयसिंह सिद्धराजा के नाम पर प्रसिद्ध पुरश शहर का नाम रखा गया है।
सोलंकी वंश के शासन के दौरान, सिद्धपुर के राजा जयसिंह सिद्धराजा के शासनकाल में यह नगर सम्पन्नता, समृद्धि में आर्यवर्त में प्रसिद्ध था।
जयसिंह सिद्धराज ने रुद्रमाहालया मंदिर को सरस्वती नदी के किनारे बलुआ पत्थर से निर्मित्त  करवाया था। इस रुद्रमहालया मंदिर के अंदर 11 शिव मंदिरों निर्माण किये गए थे जिसके उप्पर सोने की पाठ से छत बना था। गर्भगृह पश्चिम में स्थित था और वहाँ एक मंडप भी था, जिसकी पूर्वी उत्तरी, दक्षिणी चारो और खम्भे बने हुए थे।
मुस्लिम शासकों द्वारा इस मन्दिर विध्वंस के बाद आज इस परिसर के कुछ अवशेष बचे हैं जो मंदिर के प्रवेश द्वार खम्भों की और चार स्तंभों के रूप में आज देखने को मिलता हैं जो पूर्व की और मंदिर का प्रवेश द्वार हुआ करता था जिसे सोने के अलंकर से अलंकृत किया गया था यह पूर्वी द्वार सरस्वती नदी की ओर जाता है आज भी देखने को मिलता हैं।
सोमनाथ मन्दिर के तरह ही रुद्रमहालया मंदिर के वैभव की ख्याति सुदूर तक फैली हुयी थी। मुस्लिम आक्रांताओं ने मन्दिरों के वैभव को ना सिर्फ लूटा बल्कि उन्हें मस्जिद में परिवर्तित कर दिया। पृथ्वीराज चौहान को पराजित करने के बाद दिल्ली का राजा बनने वाला पहले मुस्लिम और पहले विदेशी आक्रांता मुहम्मद गोरी ने 12वी सताब्दी से मंदिरों को लूटना एवं मंदिर के मूर्तियों को ध्वस्त के मंदिर को अपवित्र करना प्रारंभ किया था। बाद में औरंगजेब तक विभिन्न मुस्लिम शासकों ने इस लूट पाट को आगे बढाते रहे। मलेच्छो ने रुद्रमहालाया, सोमनाथ, राम जन्मभूमि, कृष्णजन्म भूमि तक सारे मन्दिर या तो मस्जिद में बदल दिए या फिर मन्दिर के साथ मस्जिद बना दिए गए।
रुद्रमहालाया विशाल मंदिर के पश्चिमी हिस्से के ढाँचे को तोड़कर बाद में जामा मस्जिद में परिवर्तित कर दिया गया। प्रवेशद्वार के सीमा रेखा पर शिलालेख से आज भी यह प्रमाण मिलता हैं कि मंदिर को पूर्ण रूप से ध्वस्त कर जामा मस्जिद साल 1645 में औरंगजेब के शासनकाल के दौरान बनाया गया था।
मुस्लिम आक्रांताओ ने बहुत प्रयास किए भारत को अरब बनाने के, लेकिन सूरज कुछ देर बादलों में घिर सकता है। रात में छिप सकता है लेकिन वो फिर उगता है, अपनी नई कांति के साथ, नई चेतना नई स्फूर्ति के साथ, ऐसा ही हिन्दू अर्थात सनातन धर्म के साथ होता रहा है।
भारत में मन्दिर को तोड़कर मस्जिद बनाने की बात होती है तो सबसे पहले ध्यान में आता है 'अयोध्या का राम जन्मभूमि मन्दिर काशी विश्वनाथ मन्दिर वाराणसी, श्रीकृष्ण जन्मभूमि मथुरा, और रुद्रमाहालाया, गुजरात का एक प्राचीन शिव मंदिर, गुजरात के सोमनाथ मन्दिर को मोहम्मद गजनवी द्वारा कई बार लूटा गया।
*वहीं, कश्मीर में 170 मंदिर तोड़ डाले गए हैं लेकिन यह खबर कभी भी अखबारों और चैनलों में स्थान नहीं पा सकी। सरकार ने खुद संसद में स्वीकार किया है कश्मीर में कट्टरवादी मुसलमानों ने 170 मंदिरो कों ध्वस्थ कर दिया है। हालांकि कश्मीरी पंडितो का संगठन पनुन कश्मीर के मुताबिक 90 फीसदी मंदिर तोड़ डाले गए हैं।
अन्य धर्मों के धार्मिक स्थल मामूली सी खरोंच लग जाएं तो पूरा देश चिंतित हो जाता है। चैनलों और अखबारों में लंबे-लंबे लेख शुरू हो जाते हैं, लेकिन कश्मीर में 170 मंदिर ध्वस्त कर दिए गए कहीं चूं सी आवाज नहीं आई। ऐसे लगता है यह तो सामान्य बात हुई थी।
एक बार गृह राज्यमंत्री जितेन्द्र सिंह ने ज्ञानप्रकाश पिलानिया के सवाल के लिखित जवाब में जम्मू कश्मीर सरकार के आंकड़ों के हवाले से राज्यसभा को यह जानकारी दी थी। उन्होंने बताया था कि कश्मीर घाटी में कश्मीरी पंडितों के अब केवल 808 परिवार रह रहे हैं। 59442 पंजीकृत प्रवासी परिवार घाटी के बाहर रह रहे हैं। वास्तविक संख्या कहीं ज्यादा है। उन्होंने बताया था कि कश्मीरी पंडि़तों के घाटी से पलायन से पहले वहां उनके 430 मंदिर थे। अब इनमें से मात्र 260 सुरक्षित बचे हैं। मंत्री ने स्वीकार किया था कि 170 मंदिर क्षतिग्रस्त हो गये है। हालांकि सरकार का दावा है कि नब्बे मंदिरों की मरम्मत करायी गयी है।
जो कश्मीर पंडित वहां रह गए हैं या सरकारी नौकरी में है, उन्हें लगातार धमकियां मिल रही हैं। उन्हें कहा जा रहा है कि कश्मीर छोड़ो नहीं तो कत्ल कर देंगे।*

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