आजादी से पहले जिस क्षेत्र में कोलकाता के बाद सबसे पहले बिजली आई, जहां पूरे एशिया का एकमात्र कुष्ठरोग का अस्पताल था। जहां के चर्चे देश के साथ विदेशों में होते थे, आज वह क्षेत्र हिमाचल ही नहीं पूरे देश के सबसे पिछड़े क्षेत्रों में शामिल हो गया है। जिस क्षेत्र के आज भी विदेशों में ड़के बजते हैं वह चम्बा जिला हिमाचल नहीं बल्कि देश के 707 सबसे पिछड़े जिलों में शामिल है। इसका साफ सा कारण तो यही दिखता है कि चम्बा हमेशा राजनीतिक उपेक्षाओं का शिकार हुआ है और हो रहा है। तो कैसे यह जिला अपने पिछड़ेपन से पार पाएगा। जिस वक्त हिमाचल का गठन किया गया था, उस समय हिमाचल प्रदेश में चार जिला महासू, सिरमौर, चंबा, मंडी शामिल किए गए थे। उस दौरान अन्य जिलों की तुलना में चम्बा सबसे आगे था और आज सबसे पीछे। जिसे जिले काे समय के साथ आगे बढ़ना चाहिए था वो पिछड़ता गया। आज हालात यह हैं कि चम्बा आज हर क्षेत्र में प्रदेश के अन्य जिलों की तुलना में सबसे पीछे है। आजादी के सात दशक बीतने के बाद आज जिला चम्बा को विकास की मुख्यधारा में लाने के लिए देश के नीति आयोग को पिछड़े जिलों की सूची में शामिल करना पड़ा। यानी विकास में को चम्बा प्रदेश के अन्य 11 जिलों के बराबर लाने के लिए आगे आना पड़ा। आजादी के पूर्व चम्बा के रियासती काल पर नजर दौड़ाई जाए तो पूरे देश में कोलकाता के बाद बिजली की सुविधा सिर्फ चम्बा में ही उपलब्ध थी। चिकित्सा के मामले में तो चंबा रियासत को न सिर्फ पूरे देश में बल्कि एशिया में कुष्ठ रोग चिकित्सा सुविधा के क्षेत्र में पहला स्थान प्राप्त था। एशिया का पहला कुष्ठ रोग चिकित्सालय जिला चंबा में ही था। पुलों का निर्माण इंगलैंड की तकनीक के आधार पर किया गया। जिसका बाजूद आज भी रावी नदी पर बने शीतला पुल/विक्टोरिया पुल के नीचे आज भी अवशेष देखे जा सकते हैं। ऐतिहासिक वस्तुओं को संजोकर भावी पीढ़ी के लिए सुरक्षित रखने के लिए भूरी सिंह संग्रहालय का निर्माण भी तब हुआ था जब देश में चंद ही संग्रहालय मौजूद थे। नगर में सड़कों की व्यवस्था बेहतर थी तो साथ ही विकास भी योजनाबृद्ध ढंग से हुआ। 1947 में देश के आजाद होने के बाद जहां हर तरफ विकास की गंगा बहने लगी तो जिला चंबा में यह स्थिति उल्ट हो गई। धीरे-धीरे यह जिला विकास में इस कदर विकास में पिछड़ा कि आजादी के सात दशक बाद केंद्र सरकार को यह जिला पिछड़ा घोषित करना पड़ा, पर चिंता का विषय है कि जहां जिले को विकास की नई इबारत लिखनी चाहिए थी, वहां जिला सबसे पिछड़ गया।
केंद्र सरकार के नीति आयोग द्वारा चम्बा को पिछड़ा जिला घोषित किए जाने के बाद सत्ताधारी पार्टी के लोग जश्न मना रहे हैं। एक दूसरे को बधाईयां दे रहे हैं। बधाईयां ऐसे दे रहे हैं जैसे जिले ने राष्ट्रीय स्तर पर कोई ख्याति प्राप्त कर ली हो। मूर्खो यह बधाईयां देने का नहीं बल्कि चिंतन करने का विषय है। आपका जिला जिसमें पूरे भारत में कोलकाता को छोड़कर कहीं बिजली नहीं थी तो यह घरों में बिजली जलाता था। आजादी के बाद यहां अन्य सुविधाएं देने के लिए प्रयास किए जाने चाहिए जो नहीं हुए सभी को इस पर चिंतन करने की आवश्यकता है। लेकिन आपकी सोच कैसी है। आप तो पिछड़ेपन पर भी बधाईयां दे रहे हैं। आपकी किसी भी व्यक्ति, राजनीतिक पार्टी और एक-दूसरे की खिलाफत करने के बजाय इस पिछड़ेपन के मिले तमगे को लौटाना है। आपकी यह बधाईयां देने वाली यह हरकत किसी मूर्खता से कम नहीं है। अपने अतीत में झांको कहां से कहां आ गए हो ?

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