संजय नाम ऐसा है की जिसके शाब्दिक अर्थ को जाना जाये तो इसका सीधा संबंध ब्रह्मा और शिव है । अगर इससे भी आपको संतुष्टि न हो तो महाभारत में भी एक संजय का नाम आता है। ब्रह्मा और शिव की इस पृथ्वी पर मानव जीवन को बसाने में बहुत बड़ा योगदान है । और महाभारत के संजय के बारे में कौन नहीं जानता है। महाभारत के संजय ने ही तो अपनी दिव्य दृष्टि से धृतराष्ट्र को महाभारत का आखों देखा हाल सुनाया था। या यूँ कह लीजिये की महाभारत में संजय धृतराष्ट्र की आंखें थे जो उनको युद्ध की पल पल की घटना की जानकारी दे रहे थे। संजय की राजा धृतराष्ट्र को बता रहे थे की अब दुर्योधन की सेना का कौन सा सैनिक या सेनापति मारा गया। अब संजय नाम से तो आपको पता चल ही गया होगा की आखिर ये संजय नाम के लोग होते क्या हैं? ये वो हैं जो हर किसी को उनकी असलियत के बारे में पल पल अवगत करवाते रहते हैं। ऐसे ही संजय शर्मा नाम के समाजसेवी अभी हिमाचल प्रदेश में भी हैं जो हिमाचल में सत्ता संभाले हुए कांग्रेस पार्टी के किसान सेल के प्रदेश महासचिव हैं। जो सरकार को बार बार उसकी कार्यप्रणाली के बारे में बता रहे हैं या कहा जाये कि समाज कि आँख बन कर जनविरोधी नीतियों के बारे में सबको अवगत करवा रहे हैं। सरकार का ये निर्णय लोगों के अच्छा है या नहीं ये सरकार को बता रहे हैं चेता रहे हैं। कई बार को निर्भीक होकर चेतावनी दे चुके हैं। सरकार के कई लोग उनकी इस बेबाकी के कारण उनके दुश्मन भी बन गए हैं। लेकिन पार्टी में इतना दम नहीं दिख रहा है की उनको पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाया जा सके। उनकी कार्यप्रणाली कि देख कर अगर में उनके गरीबों का मसीहा भी कह दूँ तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी।
प्रदेश के कई जिला में उनके इतने समर्थक हैं कि उनकी आवाज पर सभी लोग एकजुट हो जाएँ। अब आप सोचोगे कि ऐसा क्यों है कि उनके कहने पर इतना सब हो जाये तो इसमें उनकी समाज सेवा का जो भाव है वही उनका सबसे बड़ा हथियार है। प्रदेश का आज ऐसा कोई जिला नहीं होगा जहाँ गरीब परिवार से संबंध रखने वाले लोग उनको नहीं जानते हों।
अगर हिमाचल प्रदेश के रहने वाले हो और संजय शर्मा नाम नहीं सुना है तो इसका मतलब है की आपके आस पास क्या हो रहा है इसकी जानकारी भी आपको नहीं होगी। तो आप सबने सुना ही है।
बीते कई सालों से आम और गरीब की आंखों में बराबर चमक और नेताओं की आंखों में "खटक" रहे समाजसेवी संजय शर्मा ने इस दफा भी राजनीतिक दलों के नेताओं की सांसे अटका दी हैं । मूलतः जयसिंहपुर विधानसभा क्षेत्र से ताल्लुक रखने वाले संजय के समाजसेवा के काम का दायरा इतना बड़ा है कि वह कांगड़ा लोकसभा क्षेत्र के साथ-साथ प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में गरीब और जरूरतमंद तबके की मदद को पहुंच जाते हैं । यही कारण है कि संजय हर विधानसभा क्षेत्र में किसी भी नेता की साँसों को अटकाने और महकाने का बराबर दम रखते हैं । इस बार भी यही संजय कई नेताओं के लिए जी का जंजाल बन गए हैं । मैंने आज उनके साथ कुछ बातचीत की और कुछ सवाल जवाब भी हुए। तो नीचे आप पढ़ सकते हैं कि उनके विचार किस तरह के हैं .......
फिर से चुनाव और फिर से संजय शर्मा से कई नेताओं को आस तो कइयों को तनाव की वजह बन गए हैं ..
जवाब-संजय शर्मा
मैं भला क्यों किसी के लिए तनाव और आस की वजह बनूँगा ? मेरे लिए नेता नहीं ,आम आदमी का तनाव और आस मायने रखते हैं ।
नेताओं को यह लगता है कि संजय का एक बहुत बड़ा वोट बैंक है तो आस और तनाव होगा न ?
जवाब-संजय शर्मा
मेरे पास कोई वोट बैंक नहीं है । मेरे पास परिवार हैं और परिवार कभी वोट बैंक नहीं होता । मेरा परिवार हर वो व्यक्ति है जिसके साथ समाज तो होता है,लेकिन नेताशाही नहीं ।
आपके कहने का मतलब क्या है ?
जवाब-संजय शर्मा
जवाब-संजय शर्मा
मेरा यही कहना है कि मैं हर उस परिवार के साथ खड़ा होता हुं, जिसके साथ कोई भी सरकारी व्यवस्था खड़ी नहीं होती । नेताओ को ऐसे परिवारों में तब कोई वोट बैंक नजर नहीं आता, जब वह सत्ता में होते हैं । चुनावों में ही इनको यह परिवार नजर आते हैं ।
तो माना जाए कि आप नेताओं के विरोध में हैं...
जवाब-संजय शर्मा
जवाब-संजय शर्मा
मैं उस व्यवस्था के विरोध में हूं, जो आम आदमी को पीस कर रख देती है । मेरा सवाल यह है कि जब कोई बीमारी से जूझता है तो उसकी मदद को कोई आगे नहीं आता । नेता इस बात का गुणगान करते हैं कि इतने अस्पताल खोल दिए,इतने खुल रहे हैं । मुझे इस बात का जवाब चाहिए कि इन अस्पतालों में गरीब आदमी को कितनी मदद की जा रही है?
मदद तो होती है सबकी । सरकार की कई योजनाएं हैं ...
जवाब-संजय शर्मा
सरकार अपने विधायकों की एनुअल मेंटिनेंस यानी सेहत के लिए चंडीगड़ और दिल्ली के निजी अस्पतालों में इलाज की सुविधा देती है । एक मंत्री बीमार हो जाए तो सीधे प्रदेश के बाहर इलाज को निकल जाता है । क्या मंत्रियों के लिए हिमाचल के अस्पताल सुरक्षित नहीं हैं । मंत्री और अफसरों की जान और आम आदमी की जान में जब तक फर्क रहेगा,संजय विरोध में खड़ा रहेगा ।
सरकार अपने विधायकों की एनुअल मेंटिनेंस यानी सेहत के लिए चंडीगड़ और दिल्ली के निजी अस्पतालों में इलाज की सुविधा देती है । एक मंत्री बीमार हो जाए तो सीधे प्रदेश के बाहर इलाज को निकल जाता है । क्या मंत्रियों के लिए हिमाचल के अस्पताल सुरक्षित नहीं हैं । मंत्री और अफसरों की जान और आम आदमी की जान में जब तक फर्क रहेगा,संजय विरोध में खड़ा रहेगा ।
जवाब-संजय शर्मा
यह सरकार का दोहरा रवैया है। पिछले 5 सालों में अवैध कब्जे हटाने के नाम पर कई लोगों के आशियानों पर मशीनेमशीनें चला दी गईं। अगर तब उन लोगों के लिए ही ऐसा फैसला ले लिया होता तो उनको अपने घरों को गिराने की नौबत ही नहीं आती।
यह सरकार का दोहरा रवैया है। पिछले 5 सालों में अवैध कब्जे हटाने के नाम पर कई लोगों के आशियानों पर मशीनेमशीनें चला दी गईं। अगर तब उन लोगों के लिए ही ऐसा फैसला ले लिया होता तो उनको अपने घरों को गिराने की नौबत ही नहीं आती।
जवाब-संजय शर्मा
सरकार को लगता है कि लाखों के वेतन भत्ते लेकर भी विधायक गरीब हैं तो मैं उनको राशन कुरियर करने जा रहा हूँ क्योंकि गरीब लोगों को तो राशन के लिए भी पैसे नहीं होते। बस हिमाचल सरकार से लोगों को यही उम्मीद रह गई थी। शर्म आती है सरकार के निर्णय पर।
सरकार को लगता है कि लाखों के वेतन भत्ते लेकर भी विधायक गरीब हैं तो मैं उनको राशन कुरियर करने जा रहा हूँ क्योंकि गरीब लोगों को तो राशन के लिए भी पैसे नहीं होते। बस हिमाचल सरकार से लोगों को यही उम्मीद रह गई थी। शर्म आती है सरकार के निर्णय पर।
जवाब-संजय शर्मा
मुझे नहीं लगता है क्योंकि इस मुद्दे पर विपक्ष भी लगभग मौन है। आम लोगों के विरोध से क्या होता है? विरोध सदन में हो तभी निर्णय वापस लिए जाते हैं। अगर सरकार यह निर्णय वापस नहीं लेती है तो मैं हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर करने से भी पीछे नहीं हटूंगा।
तो यह माना जाए कि आप खिन्न होकर चुनाव में उतरेंगे ?
जवाब-संजय शर्मा
मैं अभी तक कुछ नही कह सकता ।
मैं अभी तक कुछ नही कह सकता ।
व्यवस्था का हिस्सा बन कर सुधार से भी परहेज और आप व्यवस्था कोस भी रहे हैं । आपका मूड है क्या ?
जवाब-संजय शर्मा
मूड यही है कि लोग इस बार सोच समझ कर अपना वोट कास्ट करें । जनता को सफाई के लिए वोट डालना होगा । सफाइयां देने वाले नेताओं को राजनीति से साफ करना होगा ।
तो यह माना जाए कि आप कम से कम एक दर्जन विधानसभा हलकों में फैले अपने सहयोगियों को इस सफाई
अभियान के लिए तैयार कर चुके है ?
जवाब-संजय शर्मा
बिल्कुल। हम इस बार तोलमोल कर अच्छे लोगों को वोट डालेंगे ।
यानि मतलब यह हुआ कि संजय ब्रिगेड हर विधानसभा क्षेत्र में वोट को प्रभावित करेगी?
जवाब-संजय शर्मा
संजय ब्रिगेड नही,जनता ब्रिगेड इस बार नेताओ की ग्रेडिंग करेगी । झटके बहुत जरूरी हैं । पांच साल तक जनता को झटके देने वाली नेताओं की फौज को भी झटके जरूरी हैं ।
संजय ब्रिगेड नही,जनता ब्रिगेड इस बार नेताओ की ग्रेडिंग करेगी । झटके बहुत जरूरी हैं । पांच साल तक जनता को झटके देने वाली नेताओं की फौज को भी झटके जरूरी हैं ।
खुद चूनाव में उतर रहे हैं क्या आप ?
जवाब-संजय शर्मा
अभी ऐसा कोई इरादा नहीं है । जरूरत महसूस हुई तो इनकार भी नहीं करता । मगर एक बात जरूर कहूंगा कि मेरे लिए जनता का मत नहीं,बल्कि जनता का मन अहमियत रखता है ।

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