सवाल

आजकल संसद में कोई सवाली नहीं
गीत आ रहे हैं पर कोई कब्बाली नहीं
यहाँ वो नेता भी क्या नेता होगा दोस्त
जिसने सुनी आजतक कोई गाली नहीं


घरौदों के बाहर आज हजारों फूल हैं
लेकिन मिला उनका कोई माली नहीं
बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ मिशन चला
छेड़छाड़ हो रही है पर रखवाली नहीं


हजारों टन भोजन हो रहा रोज बर्बाद
मगर गरीबों के लिए कोई थाली नहीं
लोग पी रहे हैं पबों में बैठ कर शराब
कईयों के घर तो चाय की प्याली नहीं


यहाँ अपने कर्मों से उदास है हर कोई
नहीं लिखी किस्मत इतनी काली कहीं
सोच सोच कर तू क्या हो गया "रविन्द्र"
तभी तेरे चेहरे पे खुशी की लाली नहीं।।

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