राजनीति का शिकार

आज हर कोई राजनीति का शिकार है
एक सुखी राजनेता, जनता बीमार है
पहुंच वाला तो पहुंचा नौकरशाही पर
हुनर वाला युवा तो अभी बेरोजगार है।

ऑफिस में नेता से पहचान बताओ
चुटकी भर में अपना काम करवाओ
मैं भीड़ का हिस्सा, अजनबी हूं उनसे
मेरे से कई लाईनों में लगे लाचार है।

जब-जब भी दोबारा चुनावी दौर आया
नेता हाथ जोड़-पैर पकड़ गिड़गिड़ाया
मेरा ख्याल रखें, मुझे वोट-सपोर्ट करना
इसमें ही आपका सबसे बड़ा उपकार है।

जीता भूला मुझे, कौन तुम कहां से आए
मेरे पास वक्त नहीं, क्या परेशानी ले आए
फिर आना.. सुना नहीं...तेरेको बोला... जा
फिर नेता से "रविन्द्र" ऐसी हमें दुत्कार है।

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